Tuesday, February 26, 2013

चन्द्रशेखर आज़ाद जी के बलिदान दिवस पर श्री आज़ाद जी को शत शत नमन


चन्द्रशेखर आज़ाद जी के बलिदान दिवस पर श्री आज़ाद जी को शत शत नमन

भगतसिंह के वरिष्ठ सहयोगी और अपने "आज़ाद" नाम को सार्थक करने वाले महान क्रांतिकारी चन्द्रशेखर "आज़ाद" का जन्म 23 जुलाई 1906 को श्रीमती जगरानी देवी पण्डित सीताराम तिवारी के यहाँ भाबरा (झाबुआ मध्य प्रदेश) में हुआ था। उनके हृदय में क्रांति की ज्वाला बहुत अल्पायु से ही ज्वलंत थी। वे पण्डित रामप्रसाद "बिस्मिल" की हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसियेशन (HRA) में थे और उनकी मृत्यु के बाद नवनिर्मित हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आर्मी/ऐसोसियेशन (HSRA) के प्रमुख चुने गये थे। उनके प्रति उनके समकालीन क्रांतिकारियों के हृदय में कितना आदर रहा है उसकी एक झलक संलग्न चित्र में वर्णित आज़ाद मन्दिर से मिलती है। 1931 में छपे "आज़ाद मन्दिर" के इस चित्र में उनके शव के चित्र के साथ ही वे अपने मन्दिर में अपने क्रांतिकारी साथियों से घिरे हुए दिखाये गये हैं।
काकोरी काण्ड के बाद झांसी में
जननी, जन्मभूमि के प्रति आदरभाव से भरे "आज़ाद" को "बिस्मिल" से लेकर सरदार भगत सिंह तक उस दौर के लगभग सभी क्रांतिकारियों के साथ काम करने का अवसर मिला था। मात्र 14 वर्ष की आयु में अपनी जीविका के लिये नौकरी आरम्भ करने वाले आज़ाद ने 15 वर्ष की आयु में काशी जाकर शिक्षा फिर आरम्भ की और लगभग तभी सब कुछ त्यागकर गांधी जी के असहयोग आन्दोलन में भाग लिया। अपना नाम "आज़ाद" बताया, पुलिस के डण्डे खाये, और बाद में वयस्कों की भीड के सामने भारत माता को स्वतंत्र कराने के उद्देश्य पर एक ओजस्वी भाषण दिया। काशी की जनता ने बाद में ज्ञानवापी में एक सभा बुलाकर इस बालक का सम्मान किया। सम्पूर्णानन्द के सम्पादन में छपने वाले "मर्यादा" पत्र में इस घटना की जानकारी के साथ उनका चित्र भी छपा। यही सम्पूर्णानन्द बाद में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री भी बने।
"देश ने एक सच्चा सिपाही खो दिया।"~मोहम्मद अली जिन्ना
शहीदों के आदर्श आज़ाद
उसके बाद उन्होंने देश भर में अनेक क्रांतिकारी गतिविधियों में भाग लिया और अनेक अभियानों का प्लान, निर्देशन और संचालन किया। पण्डित रामप्रसाद बिस्मिल के काकोरी कांड से लेकर शहीद भगत सिंह के सौंडर्स संसद अभियान तक में उनका उल्लेखनीय योगदान रहा है। काकोरी काण्ड, सौण्डर्स हत्याकाण्ड बटुकेश्वर दत्त और भगत सिंह का असेम्बली बम काण्ड उनके कुछ प्रमुख अभियान रहे हैं। उनके आग्रह पर ही भगवतीचरण वोहरा ने "फ़िलॉसॉफ़ी ऑफ़ बॉम" तैयार किया था। उनके सरल, सत्यवादी और धर्मात्मा स्वभाव और अपने साथियों के प्रति प्रेम और समर्पण के लिये वे सदा आदरणीय रहे। क्रांतिकारी ही नहीं कॉंग्रेसी भी उनका बहुत आदर करते थे। अचूक निशानेबाज़ आज़ाद का प्रण था कि वे अंग्रेज़ों की जेल में नहीं रहेंगे।

भगवतीचरण वोहरा
काकोरी काण्ड के बाद फ़रार आज़ाद ने पण्डित रामप्रसाद बिस्मिल और साथियों की पैरवी और जीवन रक्षा के लिये बहुत प्रयत्न किये थे। सुखदेव, राजगुरू और भगत सिंह को बचाने के लिये उन्होंने जेल पर बम से हमले की योजना बनाई और उसके लिये नये और अधिक शक्तिशाली बमों पर काम किया। दुर्भाग्य से बमों की तैयारी और जाँच के दौरान बम विशेषज्ञ क्रांतिकारी भगवतीचरण वोहरा की मृत्यु हो गयी जिसने उन्हें शहीदत्रयी-बचाव कार्यक्रम की दिशा बदलने को मजबूर किया। वे विभिन्न कॉंग्रेसी नेताओं के अतिरिक्त उस समय जेल में बन्दी गणेश शंकर विद्यार्थी से भी मिले। दुर्गा भाभी को गांधी जी से मिलने भेजा। इलाहाबाद आकर वे नेहरूजी सहित कई बडे नेताओं से मिलकर भागदौड कर रहे थे। इलाहाबाद प्रवास के दौरान वे मोतीलाल नेहरू की शवयात्रा में भी शामिल हुए थे।
"भैया सरल स्वभाव के थे। दाँव-पेंच और कपट की बातों से उनका दम घुटता था। उस समय पूरे देश में एक संगठन था और उसके केन्द्र थे "आज़ाद" ~दुर्गा भाभी "

आज़ाद की पहली जीवनी क्रांतिकारी
विश्वनाथ वैशम्पायन ने लिखी थी
27 फ़रवरी 1931 को जब वे अपने साथी सरदार भगतसिंह की जान बचाने के लिये आनन्द भवन में नेहरू जी से मुलाकात करके निकले तब पुलिस ने उन्हें चन्द्रशेखर आज़ाद पार्क (तब ऐल्फ़्रैड पार्क) में घेर लिया। पुलिस पर अपनी पिस्तौल से गोलियाँ चलाकर "आज़ाद" ने पहले अपने साथी सुखदेव राज को वहाँ से से सुरक्षित हटाया और अंत में एक गोली अपनी कनपटी पर दाग़ ली और "आज़ाद" नाम सार्थक किया।
पुलिस ने बिना किसी सूचना के उनका अंतिम संस्कार कर दिया। बाद में पता लगने पर युवकों ने उनकी अस्थि-भस्म के साथ नगर में यात्रा निकाली। कहते हैं कि इलाहाबाद नगर ने वैसी भीड उससे पहले कभी नहीं देखी थी। यात्रा सम्पन्न होने पर प्रतिभा सान्याल, कमला नेहरू, पण्डित नेहरू, पुरुषोत्तम दास टण्डन सहित अनेक नेताओं ने इस महान क्रांतिकारी को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि दी।

दल का संबंध मुझसे है, मेरे घर वालों से नहीं। मैं नहीं चाहता कि मेरी जीवनी लिखी जाए।
~चन्द्रशेखर तिवारी "आज़ाद"

शत शत नमन श्री आज़ाद जी को

Monday, January 28, 2013

देश के साथ षड्यंत्र


पिछले कुछ दिनों से अन्तराष्ट्रीय जगत में भारत की छवि बहुत ख़राब करने की कोशिस की गयी है भारत जो की अनेकता में एकता के लिए आज से नहीं प्राचीन काल से ही विश्वविख्यात रहा है और अभी भी वो संस्कृति हमारे साथ चली रही है जैसा की हर भारत वासी जनता है की हम पाकिस्तान से आतंक के मुद्दे पर लड़ते है हमारे कई शहरों में हुए धमाको में सीधे सीधे पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद रहा है, लेकिन एक वाकया हमारे गृह मंत्री का देखिये उनका मानना है की भारत में आतंकवाद संघ और भाजपा के शिविर में पनपता है इतने बड़े और संवेनदशील पद पर होते हुए ऐसी टुच्चा छाप बयान उन्होंने क्यों और किसके दबाव में दिया ये भी एक जांच का मामला होना चाहिए। राजनीती अलग होती है और देश की अखंडता और देश की छवि अन्तराष्ट्रीय जगत में अलग होती है सभी भारत वासी का कर्तव्य है की हम अपने देश की छवि को दुनिया के सामने दागदार होने दे लेकिन ऐसे मौके परस्त और वोट बैंक के लालची नेताओ का हम क्या कर सकते है ? ये बयान भी ऐसे नहीं आया है ये कांग्रेस के चिंतन शिविर चल रही थी उस में ये बयान आया है मुझे लगता है की कांग्रेस जो की निचे गिरने की रोज एक नया मुकाम बना रही है चिंतन शिवर में भी येही योजना बन रही होगी की और कितना निचा हम गिर सकते है चंद वोटो के लिए, और कितना निचा बयान दे सकते है खुद के राजनितिक लाभ के लिए भाड़ में गया देश की छवि हैरानी की बात तो तब है की जब मुंबई हमले का आरोपी और जमाते उद दावा के संस्थापक हाफिज सईद के इस बयान पर की "आज तक भारत में जितने विस्फोट हुए है वो हिन्दू आतंकियो ने किया है और कश्मीर में भी आतंक हिन्दू ही फैला रहे है और भारत को आतंकी देश घोषित कर देना चाहिए" इस बेहूदा बयान पर हमारे गृह मंत्री और भी बहुत सारे कांग्रेसी नेता चुप्पी साध लिया ये वही नेता है जो अमूल बेबी और उनकी अम्मा के बारे में कुछ बोलने से कुत्तो की तरह भौकना शुरू कर देते है लेकिन हाफिज के इस घटिया बयान और मांग पर इन्होने विरोध भी नहीं किया ये कौन सी चुप्पी है ? चंद वोटो का लालच है या कुछ और बात है सीमापार से कोई तगड़ी सेटिंग तो नहीं चल रही है ?
अब आते है हम अपने एक फ़िल्मी बन्दर के मसले पर भारत जो इसका जन्म और कर्म भूमि है भारत के बाहर इसे कोई जानता भी नहीं है, चूँकि पाकिस्तान में आतंकी अपने जिहादियो को ये कह के उकसाते है की भारत में मुस्लिमो पर जुल्म हो रहे है और वो एक बदतर जिंदगी जी रहे है तो वो भारत के खिलाफ जिहाद करे, भारत की छवि विश्व में एक जिम्मेदार राष्ट्र की होती है जहा पर अल्पसंख्यक भी अपने पुरे अधिकार और सुरक्षित रहते है एक आम आदमी की शिकायत समझी जा सकती है लेकिन अब इस हकले बन्दर ने एक पत्रिका को दिए साक्षात्कार में बोला है की उसे भारत में उसे मुस्लिम होने के नाते शक की नजर से देखा जाता है और मुस्लिमो को भारत में अपमानित किया जाता है, अब जब एक बन्दर ही सही लेकिन एक फिल्म स्टार ऐसी बाते करेगा वो भी ऐसी तो सारी दुनिया तो यही जानेगी की जब एक फिल्म स्टार इतना डर के रह रहा है बस मुस्लिम होने के नाते तो आम अल्पसंख्यक की क्या हालत होती होगी ? वो तो बेवकूफ हम है जो इस बन्दर को अपने सर आँखों पर चढ़ा के रखा और इसे फर्श से अर्श तक पहुचाया लेकिन बोलते है की कुत्ते को घी हजम नहीं होती तो इसके साथ भी वही कहानी है इस को अब हजम होगी कहा से इतनी लोकप्रियता और तो और कुछ लोग इसे किंग खान भी बोल दिया बेचारा चला गया सातवे आसमान पर लेकिन इसे जनता ही कौन है भारतीय उपमहाद्वीप को छोड़ के, जब जब ये अमेरिका गया है वह के आव्रजन अधिकारिओ ने इसके कपडे तक खोलवा लेते है तो फिर भारत के मंत्रियो से लेके साधारण जनता अपना खुद का अपमान मानती है जो इसके साथ होता है और अमेरिका से विरोध दर्ज कराया जाता है लेकिन सब करा धरा तो इस बन्दर ने ही है आखिर दुबई में पाकिस्तान के लिए इसने स्टेज शो किया है सारा पैसा पाकिस्तान आतंकियो के लिए गया है तब से ये अमेरिका के खुफिया तन्त्र के निशाने पर है। भारत की कानून व्यवस्था को ये मजाक समझता है अभी कुछ दिन पहले इस हकले की टीम जब आईपीएल के फाइनल में खेल रही थी और जीत गयी थी तो इस हकले का तमाशा पुरे भारत ने देखा था की किस तरह ये अपनी औकात पर गया था और एक सिक्यूरिटी स्टाफ से झगड़ बैठा था, दिमाग ख़राब हो गया है इस हकले का जल्दी ही ठिकाने भी जायेगा। अब जब इसने बोल ही दिया की भारत में ये असुरक्षित महसूस करता है तो पाकिस्तान में बैठा वही आतंकी जिसने एक बार मुंबई को दहला दिया था और कई निर्दोष जाने गयी थी इस हकले को बोल की जाओ पाकिस्तान आपको सम्मान और सुरक्षा दोनों मिलेगा, भले खुद ये अपनी सुरक्षा कर पाए लेकिन बन्दर को बुला रहा है और हद तो तब हो गयी जब उसके इस निमत्रण पर हकले मियां ने कुछ जवाब भी नहीं दिए खामोश रहे यानि की सीधा तो इंकार बस चुप्पी एक तरह से हां ही होती है भले ही ये जाये लेकिन ये ना भी तो नहीं बोल सका अपने अब्बाजान को तो ये लगाव दिखता है इसका उस पगलाए सुवर से 
अब अपने गृह मंत्री और हमारे हकले खान की इन दोनों करतूतों से मुझे तो एक गहरी षड्यंत्र दिख रहा है भारत में अल्पसंख्यको को असुरक्षित भाव से भर देना और उसके बाद सीमा पार से एक इनामी जिस पर अमेरिका ने इनाम रखा है और कभी भी ड्रोन हमले में ये दोजख में जा सकता है लेकिन भारत के इन दोनों कपूतो के बयान पर उसने खासा प्रतिक्रिया दी है और हद तो तब हो गयी जब उसने ये मांग कर डाली की भारत को आतंकी देश घोषित किया जाये और हमारे सत्तासीन नेता जो बस आपस में कुत्ते बिल्ली की तरह बयानबाजी करते है एक रहस्यमयी ख़ामोशी साधे है अब तो हकले खान, गृह मंत्री और आतंकी हाफिज बिल्ला इन तीनो के पीछे से कौन है और उनका मकसद भारत की साफ सुथरी छवि को दुनिया के सामने धूमिल करना है या फिर भारत में अल्पसंख्यको को असुरक्षित भावना से भर के अपना कोई उल्लू सीधा करना है लेकिन कुछ भी हो इस खतरनाक तिगडी के पीछे से कोई और भी जरुर है जो इन पुतलो को नचा रहा है