Wednesday, December 19, 2012

देश के रँगे हुए सियार


दोस्तों पुरे देश में एक ज्वाला भड़का हुआ है और ये हमारे देश और खुद हमारा बोया हुआ आग है जो आज सबको जला रहा है आज जो धरना प्रदर्शन हो रहा है और युवा साथी और बहने भाग ले रही है देख के तो दिल में उम्मीद आती है लेकिन बस कैमरे पर अपनी छवि के अलावा इनमे सच का कोई भी गुस्सा या प्रतिशोध नहीं है इस घटिया समाज पर और ये खुद जो आज प्रदर्शन कर रहे है वो ही इसको बढ़ावा देने का काम करते है इनको देशी शब्द और राष्ट्रीयता से उतना ही चिढ है जितना की एक सांड लाल कपड़ो से चिढ़ता है इस से पहले की आप मुझे गाली दे या फिर कुछ बोले मैं आपको कुछ दिखाना चाहूँगा 
1) अमेरिका में हर साल तकरीबन 96000 बलात्कार होते है और प्रति 100000 तकरीबन 33 बलात्कार होते है 
2) ब्रिटेन में हर साल तकरीबन 16000 बलात्कार होते है और प्रति 100000 उनका आंकड़ा तकरीबन 29 है 
3) आस्ट्रेलिया में हर साल तकरीबन 19000 बलात्कार होते है और प्रति 100000 उनका आंकड़ा तकरीबन 92 के करीब आता है 
4) बेल्जियम में हर साल तकरीबन 3000 बलात्कार होते है और उनका प्रति 100000 आंकड़ा 29 आता है 
वैसे ही हर एक पश्चिमी और यूरोपीय देशो में बलात्कार बड़े पैमानों पर होती है और वो इसके लिए गंभीर भी नहीं है क्यूंकि उनके समाज में खुलापन है और वो इस से इतना चिंतित भी नहीं है
अब जरा आइये अपने देश की स्थिति समझते है 
80 के दशक में हमारे देश में प्रति साल बलात्कार 700 और प्रति 100000 ये आंकड़ा करीब 0.17 आता था 
90 के दशक में हमारे देश में प्रति साल बलात्कार 1800 और और प्रति 100000 ये आंकड़ा करीब 0.70 आता था 
2000 के दशक में यही बलात्कार का आंकड़ा बस दस सालो में ही बढ़कर अचानक ही 6000 और प्रति 100000 ये आंकड़ा करीब 1.6 गया 
और 2008 में यही आंकड़ा 6000 से बढ़कर करीब 9000 हो गया और प्रति 100000 ये आंकड़ा करीब  1.9 करीब गया और अभी वर्तमान में हमारे देश में एक साल में कम से कम 19000 बहनों के साथ ऐसा कुकर्म होता है और प्रति 100000 ये आंकड़ा करीब करीब 2.5 के पर जा चूका है फिर भी ये पश्चिमी देशो के मुकाबले बहुत ही कम है और आज के हमारे यही युवा जो फेसबुक और रोड पर और इंडिया गेट पर हाथ में मोमबतिया लेके खड़े रहते है और लगता है की हमारे देश में कितने सुसंस्कृत युवा रहते है, लेकिन इन रँगे हुए सियारों को कोई जनता नहीं है की जब जिस्म और मर्डर फिल्म आती है और कोई भी फिल्म जो की समाज में अपने परिवार वालो के साथ नहीं देख सकते है तब आप देखेंगे की ये ही रँगे हुए सियार वह भीड़ बनाये हुए है चाहे वो गूगल पर सन्नी लिओनि का सर्च हो या पूनम पाण्डेय और शर्लिन चोपड़ा के फोल्लोवेर्स हो सब यही है नहीं तो इन दो टेक की लडकियों की क्या औकात थी की ये पुरे भारत में लडकियो के प्रति सोच ही बदल के रख देती लेकिन ये हमारे रँगे हुए सियार ही है जो इन्हें आँखों और पलको पर बैठाते है अगर ये फिल्मे देखते तो इन फिल्मो के जो भांड निर्माता फिर से हिम्मत नहीं करते लेकिन वो जब देखते है की हमारे देश के युवा को बस सेक्स चाहिए तो वो वही बनाते है क्यों सामाजिक मुद्दे पर फिल्मे फ्लॉप हो जाती है और बस उन्हें समाज का एक छोटा सा वर्ग ही पसंद करता है और क्यों एक छिछोरे से इन्सान को सुपर स्टार बना दिया जाता है वो इमरान जिसे एक सीधा संवाद बोलने नहीं आता वो आज का सुपर स्टार है क्यों बस इन्ही सियारों के वजह से कई ऐसी गन्दी लड़किया जिन्हें सभ्य समाज में देखना भी एक शर्म है वो आज टीवी और फिल्मो में आती है और तमाम विज्ञापनों में आती है क्यूंकि विज्ञापन बनाने वाला जनता है की इसका उपयोग युवा ही करता है और आज तो चाहे वो साबुन हो या खाने का कोई सामान या फिर पूजा या फिर कपडे का कोई विज्ञापन उसमे इतनी अश्लीलता परोसी जाती है क्यों क्यूंकि हम वही देखना पसंद करते है और इसी लिए वो बनते है हमें याद रखना चाहिए की किसी भी समाज को वही माहौल मिलता है जैसा की वो खुद चाहता है क्या हमने आज तक किसी अश्लील फिल्म को फ्लॉप करवाया है नहीं ? हम क्या गन्दी औरतो को अपना स्टार क्यों बनाते है ? हम बिग बॉस और रोडीज जैसे प्रोग्राम देखते है क्यू
क्यूंकि हम पर पश्चिमी सभ्यता एक दम जादू कर रखा है हम हर एक लाइन में cool, chill, fun  और  enjoy बोलते ही है हमें सीधापन पसंद नहीं है सीधा सा देहाती बोल के आपको बगल कर दिया जाता है। तो जब हम पश्चिमी सभ्यता को सर पर चढ़ाएंगे तो उसी ने अनुसार बलात्कार, और हमारी मानसिक नैतिकता का तो गिरना ही है तो फिर ये झूठा प्रदर्शन क्यों ? ये दोगलापन क्यों जब आप खुद ही आधुनिक बन ने का भुत है तो फिर आप खुद समाज में ये गंदगी फैला रहे हो और अब प्रदर्शन तो मत करो 
अगर थोडा सा भी बदलाव महसूस किया हो ये पढ़ के तो कसम ले लो की आज के बाद ही कोई c ग्रेड स्टार की d ग्रेड फिल्म देखेंगे ही पश्चिमी सभ्यता के पीछे भागेंगे अपनी संस्कृति ऐसे ही पूरी दुनिया में बेजोड़ है कहा गया वो दौर जब पूर्व और पश्चिम टाइप की फिल्मे बनती थी हम ही इस देश का भविष्य है और हमें ही तय करना है की कैसे समाज में हमें रहना है 
~~ अक्षय 

Wednesday, October 24, 2012

क्या आप जानते हैं ? तो आइये और खुले में चर्चा करते है

जम्मू और कश्मीर विधानसभा की अवधि ६ साल और अन्य राज्यों की ५ साल क्यों ?

सच जो आप जानना चाहते है

केरल में विधायक, संसद और मंत्री अल्लाह,यीशु के नाम से सपथ लेते है | अगर हिंदू राम या कृष्ण के नाम से ले तो संबिधान के खिलाफ है ?

अरबी भाषा को प्रमोट करने के लिए सरकार पैसे खर्च कर रही है | लेकिन संस्कृत पर क्यों नही ? क्या अरबी भाषा, संस्कृत के तुलना में अधिक राष्ट्रीय है ?

IMTD Act क़ानूनी अधिकार से असम में बंगलादेशियो को भारत में बसने और नागरिक बनने का अधिकार देता है | तो जम्
मू और कश्मीर में शेष भारतीय को बसने का अशिकर क्यों नही ? यह दोगली निति क्या है ?

जम्मू और कश्मीर कि जनसंख्या लगभग एक करोड है जिन्हें २४००० करोड रुपये कि सहायता दी गयी है | यानी कि पर हेड २४००० रुपये | जबकि शेष राज्यों को इनसे ५% कम कि सहायता दी जाती है |क्या यह राष्ट्र विरोशियो के लिए इनाम नही है ?

यदि पेंटिंग करना गैर- इस्लामिक है तो मुसलमानों ने एम् एफ हुसैन के खिलाफ कितने फतवे जारी किये गए थे ? क्या वो गैर- इस्लामिक कार्य नही किया था ?

यदि इस्लाम में गायन, संगीत और नृत्य गैर- इस्लामिक है ( क्योकि इस्लाम एक गंभीर धर्म है ) तो बहुत “खान” फिल्म में अभिनय करते है | इनके खिलाफ फतवा क्यों नही जारी किया गया ?

क्या आप को लगता है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक देश रहेगा यदि मुसलमानों का बहुमत हो जाय तो ?

हॉउस आफ कामंस, आस्ट्रेलिया संसद और ह्वाईट हॉउस आदि में जब दीपावली और जन्माष्टमी मनाया जाता है तो भारत के संसद में क्यों नही मनाया जाता है ? क्या हम संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका, ब्रिटेन और आस्ट्रेलिया कि तुलना में अधिक धर्मनिरपेक्ष है ?

यदि सांप्रदायिक दंगे भारत में आर एस एस, विहिप, बजरंग दल आदि के कारन होता है तो “ पाकिस्तान, तुर्की, अफगानिस्तान, इंडोनेशिया, चेचन्या, चीन, रूस, ब्रिटेन, स्पेन, साईप्रस आदि में किसकी अजह से दंगे होते है ?” जब कि वहाँ पर आर एस एस / विहिप नही है |

एक पूर्व राष्ट्रपति, दो पूर्व प्रधानमंत्रियों, साधुओ,और संतो द्वारा कांची के संकराचार्य कि गिरफ्तारी के खिलाफ प्रदर्शन किया है | लेकिन मिडिया का कहना है कि “वहाँ बिलकुल कोई विरोध नही हुआ है”| क्या आप को लगता है कि केवल हिन्=हिंसा ही लोगो की [पीड़ा मापने का पैमाना है ?

क्या आप को विश्वास है कि इस्लाम और ईसाईयत को सर्वधर्म समभाव में विश्वास है ? यदि हाँ, तो धर्म रूपांतरण में विश्वास क्यों करते है ?

ईश्वर अल्लाह तेरे नाम – आप मुझे एक मुसलमान दिखाए जो इससे सहमत हो ?

क्या आप को नही लगता है कि “ सेक्युलर मुस्लिम एक मिथ्या नाम है ? एक व्यक्ति या तो सेक्युलर या मुसलमान हो सकता है, दोनों नही ? एक मुस्लिम ( जो केवल अल्लाह में विश्वास करता है) धर्म-निरपेक्ष(कई परमेश्वर में विश्वास) नही हो सकता है |

क्या आप जानते है कि “ तथाकथित धर्मनिरपेक्ष मौलाना वहीदुद्दीन, जब भारतीय सैनिक कारगिल में लड़ रहे थे तो, उनसे सैनिको के लिए प्रार्थना करने को कहा गया तो इंकार कर दिया ? क्योकि भारतीय सैनिक मुसलमानों से लड़ रहे थे ?” ( बाद में सोनिया और प्रियंका ने उसके अंतिम संस्कार में भाग ली थी )

संयुक्त राष्ट्र चार्टर का कहना है कि “ अल्पसंख्यक का मतलब पूरी आबादी का अधिक से अधिक १०% होता है | मुसलमान, जो लगाभाग १८% से ऊपर है को एक अल्पसंख्यक कैसे कहा जा सकता है ?

क्या आप को विश्वास है कि “कम्युनिस्टों को भारत से प्यार है ?”, जब कि वे स्वीकार करने से मना करते है कि १९६२ में चीन भारत पर हमलावर था ?

ये कैसे होता है कि “ एक मुस्लिम परिवार मुख्य रूप से हिंदू इलाके में शांति से रहता है, जबकि एक मुस्लिम बस्ती में एक हिंदू परिवार ऐसा करने में सक्षम नही है ?

मुस्लिम बहुत क्षेत्रो में ईसाई मिशिनारिज क्यों नही सामाजिक सेवाए शुरू कराती है ? क्योकि वहाँ निवेश पर पर्याप्त फल नहीं मिलेगा |

क्या आप जानते है कि “ भारत एक मात्र देश है जो खुले तौर पर बंगलादेश के घुसपैठियों को आमंत्रित किया है | बिहार, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के सरकारों ने तत्काल उन्हें रासन कार्ड उपलब्ध कराके मतदाता बना दिया |”

दंगे शुक्रवार की नमाज के बाद ही ज्यादातर हुए है ( जैसे मरद, केरल) | क्या यह इमामों के ज्वलंत उपदेशो की वजह से नही है ?

सभी हिंदू बहुल क्षेत्र शांतिपूर्ण है, लेकिन सभी हिंदू अल्पसंख्यक क्षेत्र समस्याग्रस्त है – जम्मू और कश्मीर, उत्तर – पूर्वी भारत आदि | क्या आप इसकी व्याख्या कर सकते है कि ऐसा क्यों ?

एक विधायक, सी. पी. शाजी ने केरल विधानसभा में कहा कि “ वो हाथ काट दिया जायेगा, जो शरियत के एक अक्षर को छुयेगा” | क्या आप इससे सहमत है ?

क्या आप जानते है कि “भारत में अवैध रूप से आये मुस्लिम अप्रवाशी २५ लोकसभा और १२० विधानसभा सीटों के चुनाव में एक निर्णायक कारक बन गए है ? और वे एक विशेष पार्टी के लिए एकजुट हो के मतदान करते है – कंग्रस, राजद, सपा, एमएल, या साम्यवादी |”

एक पाकिस्तानी भारतीय हो सकता है ? जब वह जम्मू और कश्मीर के किसी एक लडकी से शादी कर ले, लेकिन इसके विपरीत जब वही लड़की भारत के किसी भी हिस्से के एक हिंदू से शादी करे तो वह जम्मू और कश्मीर की नागरिक नहीं हो सकते है, जम्मू और कश्मीर कि नागरिकाता खो देती है ? यह किस तरह का कानून है ?

अयोध्या मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने विश्व हिंदू परिषद पूछताछ की लेकिन बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी या आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड से सवाल नही की? क्या यह सुप्रीम कोर्ट का दुहरा मापदंड नही है ?

जब आप नरेन्द्र मोदी जैसे लोगो से तुच्छ आधार पर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा मांग रहे है तो आप क्यों नही जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री से इस्तीफा माँगते है ? जहां पर हजारों सैनिक आतंकवादियों द्वारा मार दिए गए है और तो और ४ लाख हिन्दुओ का सफाया कर दिया गया है |

लोकपाल कश्मीर मे नहीं लागू होगा

जम्मू और कश्मीर का पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला एक ईसाई से शादी किया और वर्तमान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला एक हिंदू लडकी से शादी करके आनंदित थे, लेकिन जब उसकी बेटी एक हिंदू लड़के से शादी कर ली तो उसका परित्याग कर दिया गया | क्या यही धर्मनिरपेक्षता का पहचान है ?

कश्मीर मे सोनिया का सांप्रदायिक हिंसा बिल कानून लागू नहीं होगा क्योंकि वहाँ अल्प संख्यक हिन्दू - सिख है वे भी मात्र 2-3 हजार

भारतीय कानून के अनुसार “ मानव अंगों को किसी भी पार्टी के चुनाव चिन्ह के रूप में नही लिया जा सकता है” तो कैसे कांग्रेस पार्टी को ‘हाथ’ का प्रतिक आवंटित किया गया है ? यह कानून के खिलाफ नही है ?

दिल्ली इमाम सैयद बुखारी के घोषणा थी कि तालिबान सभी मुसलमानों के लिए आदर्श है और ओसामा बिन लादेन नायक ? क्या आप इस धर्मनिरपेक्षता पर विचार करेंगे ?

जम्मू और कश्मीर के संसदीय चुनाव के लिए २ लाख हिंदू वयस्क मतदाता है | लेकिन विधानसभा के लिए नही ? क्यों ?

जम्मू और कश्मीर विधानसभा की अवधि ६ साल और अन्य राज्यों की ५ साल क्यों ?

बंगलादेश में हिंदू लड़किया पीटी जाती है, उनके साथ गैंग रैप किया जाता है | प्रतिदिन मंदिरों को जलने या नष्ट करने कि खबरे पढैते होंगे | क्या हमारे धर्मनिरपेक्षतावादी और मानवाधिकारी कार्यकर्ताओ को इनके लिए आवाज़ नही उठानी चाहिए ? क्या सिर्फ मुसलमानों के लिए ही मानवाधिकार है ?

क्या आप जानते है कि “ इस्लाम राष्ट्रवाद और राष्ट्रिय सीमाओ में विश्वास नही करता है | यह पूरी दुनिया को इस्लाम के तहत दारुल हरब से दारुल इस्लाम तक लाना चाहते है ?”

क्यों मुस्लिम मस्जिद और मदरसे में जाते है न कि स्कूल और कालेज में ? क्या मदरसा भी वैज्ञानिक और इंजिनियर तैयार करता है ? ( सेक्युलर नेताओ द्वारा मुसलमानों को अलग से आरक्षण के लिए अपना सर पिटने के सन्दर्भ में )

मुहर्रम जुलूस हिंदू बाहुल्य क्षेत्रो से लाया जारहा है लेकिन हिंदू धार्मिक जुलूस मुस्लिम इलाको से अनुमति नही है क्यों ? क्या यह सम्रदायिक बटवारे को स्थायी नही करता है ?

क्या आपको लगता है कि नेहरू परिवार ही एक परिवार है जो आजादी के लिए लड़े या अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ke भी थे? जैसे भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, मदनलाल धींगरा ,वन्शिनाथान, चापेकर ब्रदर्स, वीर सावरकर, राज गुरु, सुभाष चंद्र बोस, उधम सिंह आदि |

मल्लापुरम ( केरल) में , एक डाक्टर ने पाया कि मुस्लिम महिलाओ कि तीन पीढियां बेटी-१३, माँ-२६ और दादी – ३९ सभी गर्भवती है तथा प्रसव के लिए भारती कराया | क्या आप को भी लगता है कि मुसलमानों के लिए परिवार नियोजन अनावश्यक है ?

रामायण के लेखक ऋषि वाल्मीकि एक डाकू थे, उसी तरह महाभारत के लेखक वेड व्यास एक मछुवारे थे | दोनों महाकाव्यो और लेखक हिन्दुओ द्वारा प्रतिष्ठित है | क्या अब भी लगता है कि हिंदू धर्म जातिवाद का समर्थन करता है ?

२००२ में कर्नाटक सरकार मंदिरों द्वारा प्राप्त ७२ करोड रुपयों में से ५० करोड मदरसों को, १० करोड चर्च को, १० करोड मंदिरों को दिया गया | मदरसो (आतंकवादी कारखाना ) और चर्चो के विकास के लिए हिन्दुओ का पैसा क्या देना चाहिए ?

जब अफगानिस्तान में तालिबान, बुद्ध प्रतिमा को ध्वस्त कर दिया, तो टाइम्स ऑफ इंडिया ने लिखा है कि यह बाबरी मस्जिदके विध्वंस की प्रतिक्रिया में था. क्या आप टाइम्स ऑफ इंडिया द्वारा के इस औचित्य से सहमत? जैसे को तैसा के लिए ठीक है? तो फिर तुम क्यों गोधरा कांड की प्रतिक्रिया में गुजरात दंगों की आलोचना करते हो ?

पांडिचेरी में एक मुस्लिम को दफनाने से इनकार कर दिया गया था क्योंकि वह प्रभु मुरुगा के लिए एक मंदिर का निर्माण किया था क्या आप को भी लगता है कि "धर्म एक दूसरे से नफरत नहीं सिखाते हैं"?

१९८९ में कांग्रेस के चुनावी घोषणापत्र में राजीव गाँधी ने घोषणा की कि “ अगर मिजोरम में कांग्रेस सत्ता में आई तो यहाँ बाईबल के अधर पर शिक्षाए दी जायेगी (?)” यदि यह सांप्रदायिक नही है तो क्या है ?

वर्ल्ड मुस्लिम अल्पसंख्य समुदाय के अध्यक्ष, कुवैत के शेख अल सईद युसूफ सयेद हासिम रिफाई को केरल में बिना वीजा के आने कि अनुमति दी गयी थी और उन्हें गिर्गिराफ्तर नही किया गया बल्कि केरल सर्कार के सरकारी दामाद की तरह खातिरदारी कि गयी और लेजाने लाने के लिए सरकारी कार कि व्यवस्था कि गयी थी | क्या यह राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने वाला कार्य है ?

यदि ब्रिटेन और अमेरिका( एक धर्म निरपेक्ष देश) में एक से अधिक महिला से शादी करने कि अनुमति नही है तो क्या भारत में एक से अधिक औरतो से शादी करने कि अनुमति देनी चाहिए ?

पोप को भारत कि यात्रा को आमंत्रित किया गया था लेकिन नेपाल के राजा महेंद्र को नागपुर में १९६५ में मकरसंक्रांति समारोह में भाग लेने के लिए अनुमति नही दी गयी थी | क्या यही धर्म निरपेक्षता है ?

अशोक और कनिष्क अफगानिस्तान पर शासन किया. कंधारी जो की दुर्योधन की माँ, कंधार से आया है ( अब अफगानिस्तान में )| क्या आप मानते हैं कि अफगानिस्तान एकबार भारत का अभिन्न हिस्सा था?

त्रिपुरा में बैप्टिस्ट चर्च को न्यूजीलैंड से 60 साल पहले मिशनरियों द्वारा स्थापित किया गया था | क्या आपको लगता है कि चर्च राष्ट्रवाद को बढ़ावा देंगे?

पाकिस्तान में छात्रों को शुरू से ही सिखाया जाता है कि हिंदु हमारे दुश्मन हैं, हिंदू से मित्रता कभी नहीं किया जा सकता है काफिरो (हिंदुओं) को मार देना चाहिए. क्या आप को अब भी लगता है कि दोस्ती पाकिस्तान के साथ संभव है?

पाकिस्तान इस्लामी देश है,बायीं-पास सर्जरी या कैंसर के इलाज के लिए भारत आते है | पाकिस्तान कैसा एक देश है जिसके पास परमाणु विकशित करने की क्षमता है लेकिन एक अच्छे अस्पताल कि नही ?इसका मतलब है कि पाकिस्तानी सिर्फ ट्रिगर से खुश है विकास और स्वास्थ्य सीवाओ की कीमत पर |

कम्युनिस्ट नेता स्टालिन की बेटी, स्वेतलाना, दिनेश सिंह के भाई से शादी करने के लिए और भारत में बसने की कामना की | हमारे साम्यवादियों और इंदिरा गांधी ने इस का विरोध किया | वे अब कैसे एक इतालवी महिला का समर्थन करे ?

जब योगा संयुक्त राज्य अमेरिका में एक करोड़ों डॉलर का उद्योग है, हमारी सरकार क्यों अंधी बन गयी है इस तकनीक मानवविकास के लिए ? क्या इसलिए कि यह हिंदू संस्कृति का एक हिस्सा है ?

पूजा में 'संकल्प' "भारत वर्षे , भारत कंडे......... के साथ शुरू होता है ...". ये क्या हैं? क्या आप को अभी भी लगता है कि अध्यात्मवाद और राष्ट्रवाद अलग कर रहे हैं ? ये राष्ट्र की दो आंखें है?

अध्यात्मवाद और राष्ट्रवाद भारत में अविभाज्य हैं.क्या आपको नहीं लगता कि अध्यात्मवाद के बिना भारत बिना आत्मा के एक शरीर की तरह हो जाएगा?

हिंदू धर्म में आप को सुधारको कि संख्या बहुत मिल जायेगी | अन्य धर्मो में क्यों नही पाई जाती है ? क्या इन्हें सुधारने कि जरुरत नही है कि सुधारे हुए है ?


ये लेख मैंने कही और से लिया है उन दोस्त का नाम नहीं मालूम है 

Monday, October 1, 2012

गाँधी या गंधासुर: अहिंसा का ढोंग

गांधी संत या ..... ? -आपसे निवेदन है की इसे पहले पढे!! फिर बहस करे
पाकिस्तान से दिल्ली की तरफ जो रेलगाड़िया आ रही थी, उनमे हिन्दू इस प्रकारबैठे थे जैसे माल की बोरिया एक के ऊपर एक रची जाती हैं.अन्दर ज्यादातर मरे हुए ही थे गला कटे हुए.रेलगाड़ी के छप्पर पर बहुत से लोग बैठे हुए थे, डिब्बों के अन्दर सिर्फ सांस लेने भर की जगह बाकी थी.बैलगाड़िया ट्रक्स हिन्दुओं से भरे हुए थे.रेलगाड़ियों पर लिखा हुआ था, " आज़ादी का तोहफा" - जैसे ही अदला बदली हुई इस्लाम हावी हुआ हिन्दू पर चढ़ा गांधी की अहिंसा का बोलबाला, यह वही लोग थेजो बटवारे से पहले इन हिन्दुओ के साथ रहते थे. अब काट रहे है रेलगाड़ी में जो लाशें भरी हुई थी उनकी हालत कुछ ऐसी थी की उनको उठाना मुश्किल था दिल्ली पुलिस को फावड़ें में उन लाशों को भरकर उठाना पड़ा. ट्रक में भरकरकिसी निर्जनस्थान पर ले जाकर ,उनपर पेट्रोल के फवारे मारकर उन लाशों को जलाना पड़ा इतनी विकट हालत थी उन मृतदेहों की.भयानक बदबू......
जिन स्थानों से लोगों ने जाने से मना कर दिया ,उन स्थानों पर हिन्दू स्त्रियों की यात्रा (धिंड)निकाली गयी. उनको बाज़ार सजाकर बोलियाँ लगायी गयी. 1947 के बाद दिल्ली में 400000 हिन्दू निर्वासित आये.और इन हिन्दुओं को जिस हाल में यहाँ आना पड़ा था,,उसके बावजूद पाकिस्तान को पचपन करोड़ रुपये देने ही चाहिए ऐसा महात्मा जी का आग्रह था...क्योकि एक तिहाई भारत के तुकडे हुए हैं तो भारत के खजाने का एक तिहाई हिस्सा पाकिस्तान को मिलना चाहिए था.विधि मंडल ने विरोध किया,,पैसा नहीं देगे..और फिर बिरला भवन के पटांगन में महात्मा जी अनशन पर बैठ गए...पैसे दो,नहीं तो मैं मर जाउगा..एक तरफ अपने मुहँ से ये कहने वाले महात्मा जी , की हिंसा उनको पसंद नहीं हैं,, दूसरी तरफ जो हिंसा कर रहे थे उनके लिए अनशन पर बैठ गए.
दिल्ली में हिन्दू निर्वासितों के रहने की कोई व्यवस्था नहीं थी.इससे ज्यादा बुरी बात ये थी की दिल्ली में खाली पड़ी मस्जिदों में हिन्दुओं ने शरण ली तब बिरला भवन से महात्मा जी ने भाषण में कहा की दिल्लीपुलिस को मेरा आदेश हैं मस्जिद जैसी चीजों पर हिन्दुओं का कोई ताबा नहीं रहना चाहिए.निर्वासितों को बाहर निकालकर मस्जिदे खाली करे.. क्योंकि महात्मा जी की दृष्टी में जान सिर्फ मुसलमानों में थी हिन्दुओं में नहीं. जनवरी की कडकडाती ठंडी में हिन्दू महिलाओं और छोटे छोटे बच्चों को हाथ पकड़कर पुलिस ने मस्जिद के बाहर निकाला. गटर के किनारे रहो लेकिन छत के निचे नहीं.क्योकि,,तुम हिन्दू हो.....4000000 हिन्दू भारत में आये थे,,ये सोचकर की ये भारत हमारा हैं..ये सब निर्वासित गांधीजी से मिलाने बिरला भवन जाते थे तब गांधीजी माइक पर से कहते थे, क्यों आये यहाँ अपने घरदार बेचकर, वहीँ परअहिंसात्मक प्रतिकार करके क्यों नहीं रहे?? यही अपराध हुआ तुमसे अभी भी वही वापस जाओ..और ये महात्मा किस आशा पर पाकिस्तान को पचपन करोड़ रुपये देने निकले थे ?
सरदार पटेल ने कहा की ठीक हैं अगर भाई को इस्टेट मेंसे हिस्सा देना पड़ता हैं तो कर्ज की रकम का हिस्सा भी चुकाना पड़ता हैं. गंदिजी ने कहा बराबर हैं पटेल जी ने कहा,"फिर दुसरेमहायुद्ध के समय अपने देश ने 110 करोड़ रुपये कर्ज के रूप में खड़े किये थे, अब उसका एक तृतीय भाग पाकिस्तान को देने का कहिये, आप तो बैरिस्टर हैंआपको कायदा पता हैं. " गांधीजी ने कहा,,नहीं ये नहीं होगा अमृतसर के जलियाँवाला बाग़ गोली काण्ड (1919) से समस्त देशवासी आक्रोश में थे तथा चाहते थे कि इस नरसंहार के खलनायक जनरल डायर पर अभियोग चलाया जाए। गांधी ने भारतवासियों के इस आग्रह को समर्थन देने से मना कर दिया।
भगत सिंह व उसके साथियों के मृत्युदण्ड के निर्णय से सारा देश क्षुब्ध था व गांधी की ओर देख रहा था किवह हस्तक्षेप कर इन देशभक्तों को मृत्यु से बचाएं, किन्तु गांधी ठहरे प्रसिद्धि के भूखे, भगत सिंह को हीरो कैसे बनने देते? उसने भगत सिंह की हिंसा को अनुचित ठहराते हुए जनसामान्य की इस माँग को अस्वीकार कर दिया। क्या आश्चर्य कि आज भी भगतसिंह वे अन्य क्रान्तिकारियों को आतंकवादी कहा जाता है। कॉंग्रेस मित्र वामपंथी भगत सिंह को आतंकी मानते है।
6 मई 1946 को समाजवादी कार्यकर्ताओं को अपने सम्बोधन में गान्धी ने मुस्लिम लीग की हिंसा के समक्ष अपनी आहुति देने की प्रेरणा दी। मोहम्मद अली जिन्ना आदि राष्ट्रवादी मुस्लिम नेताओं के विरोध को अनदेखा करते हुए 1921में गांधी ने खिलाफ़त आन्दोलन को समर्थन देने की घोषणा की। तो भी केरल के मोपला में मुसलमानों द्वारा वहाँ के हिन्दुओं की मारकाट की जिसमें लगभग 1500 हिन्दु मारे गए व 2000 से अधिक को मुसलमानबना लिया गया। गांधी ने इसहिंसा का विरोध नहीं किया,वरन् खुदा के बहादुर बन्दों की बहादुरी के रूप में वर्णन किया। 1926 में आर्य समाज द्वारा चलाए गए शुद्धि आन्दोलन में लगे स्वामी श्रद्धानन्द जी की हत्या अब्दुल रशीद नामक एक मुस्लिम युवक ने कर दी, इसकी प्रतिक्रियास्वरूप गांधी ने अब्दुल रशीद को अपना भाई कह कर उसके इस कृत्य को उचित ठहराया व शुद्धि आन्दोलन को अनर्गलराष्ट्र-विरोधी तथा हिन्दु-मुस्लिम एकता के लिए अहितकारी घोषित किया।गांधी ने जहाँ एक ओर कश्मीर के हिन्दु राजा हरि सिंह को कश्मीर मुस्लिम बहुल होने से शासन छोड़ने व काशी जाकर प्रायश्चित करने का परामर्श दिया, वहीं दूसरी ओर हैदराबाद के निज़ाम के शासन का हिन्दु बहुल हैदराबाद में समर्थन किया।
 

Thursday, June 7, 2012

अजीब देश है हमारा भी !!!


 मुझे लगता है भारत में 4 और संस्थाओ को एक अलग देश घोषित कर देना चाहिए क्यूंकि ये भारत के संविधान और कानून का खुल्लम खुल्ला मजाक उड़ाती है और भारत का कानून एक असहाय की भांति बस उनका मुह देखता है  :

पहली स्वतंत्र संस्था है मुस्लिम  पर्सनल ला बोर्ड :
चूँकि कोई भी देश कानून और संविधान से चलता है और जाहिर सी बात है देश के अंदर रहने वाले सभी नागरिक इसी कानून का पालन करते है लेकिन भारत के अजीबोगरीब देश है यहाँ पर शादी के लिए जो उम्र हमारे कानून  में है वो लडकियों के लिए कम से कम 18 और लडको के लिए कम से कम 21 है लेकिन ये कानून देश के अंदर रह रहे मुस्लिमो पर लागु नहीं होता मुस्लिम लडकियो की शादी 15 साल पर भी हो सकती है भले ही इस उम्र में वो शादी का मतलब भी न समझती हो लेकिन वो ऐसा कर सकते है धर्म के आधार पर कानून बनाने का ये अनूठा तरीका है और इसी बात का फायदा उठा के सुनने में आया है की चूँकि मुस्लिम धर्म में  खून का खास महत्व है इसी लिए हर धार्मिक उत्सव में वो किसी न किसी  जानवर को काटते ही है  इस लिए सरकार विचार कर रही है की हर एक मुस्लिम को 3 खून करने की आज़ादी हो जिस से की उनकी धार्मिक स्वतंत्रता बनी रहे और भारतीय संविधान जिसके अनुसार यहाँ पर सभी धर्मो को अपने धार्मिक कार्यो पर आज़ादी मिलनी चाहिये वाली धारा सच हो सके !!!!!!!!!!!
इनमे से दूसरी संस्था है हमारी फ़िल्मी दुनिया यानि की बॉलीवुड :
कोई भी कानून या कोई एक्ट अगर बॉलीवुड के खिलाफ हुआ तो बॉलीवुड के सरे सदस्य पानी पी पी के सरकार और कानून को कोसने लगते है और कोसा तो खबरों में और अगर समर्थन कर दिया तो खबरों में जैसे की 
डर्टी पिक्चर को रात में प्राइम टाइम में न दिखने पर खबर सुर्खियो में थी की बॉलीवुड ने इसका जमकर विरोध किया|
शाहरुख़ खान को अमेरिका तंग करता है तो खबर आती है बॉलीवुड ने इसका जोरदार विरोध किया जैसे बॉलीवुड पुरे भारत से अलग है इसी का फायदा उठा के बॉलीवुड ने निर्णय लिया है की कोई कानून बनाने या भ्रष्ट नेता को बचाने में बॉलीवुड अब एक स्वतंत्र संस्था के रूप में आगे आएगी और बन्दर माफ़ कीजियेगा शाहरुख़ खान इसके मुखिया होंगे 
तीसरी स्वतंत्र संस्था है भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड :
चाहे भारत का कानून लाख मना कर दे लेकिन होगा वही जो भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड का मन होगा चाहे हो IPL का दूसरा संस्करण सरकार के मनाही के वावजूद कही और खेलना या फिर   IPL में  ड्रग्स और काले धन का खुल्लम खुल्ला उपयोग भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड ने भी तय कर लिया है की अब हम स्वतंत्र है सुन ने में आया है की भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड ने अब तय किया है की वो भी अब अपना जोर क्रिकेट में लगाने के वजय अपने खिलाडियो को नेता बनाने और चुनाव प्रचार करने में लगाएगी और चूँकि पैसो की खूब संभावना है इस क्षेत्र में इस लिए भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड जो की पैसो के लिए कुछ भी करने को तैयार रहती है इसे बुरा नहीं मानती |
चौथी संस्था है भीड़ 
जी हा जितना देश को पडोसी दुश्मन देश से डरना चाहिए उतना तो वो तो यहाँ भीड़ से डरती है जैसे की कसाब को फंसी नहीं दी जा सकती नहीं तो भीड़ कश्मीर में दंगा कर देगी, अफजल गुरु को फाँसी देने से देश में पागल भीड़ माहौल खराब कर सकती है, एक मुख्यमंत्री के हत्यारे को इसी भीड़ के डर से फाँसी नहीं दी जा सकी, सुन ने में आया है की अब आतंकवादी भी अपने लिए भीड़ की व्यवस्था करेंगे और जहा भी लगा की कुछ गड़बड़ है उनके लिए बस उनकी भीड़ आ जाएगी उनको बचाने ऐसे ही जैसे की कुछ नेता अपने लिए किराये की भीड़ इकट्ठी करते है ! अब तो अपराधियो ने भी अपनी एक भीड़ तैयार करने की सोच रही है ताकि कानून और पुलिस से बचा जा सके और कुछ भी करे और तुरंत भीड़ इकट्ठी कर ले | 
~~ अक्षय 


Monday, May 28, 2012



                     श्री विनायक दामोदर सावरकर 


स्वातंत्र्यवीर सावरकर का सवतंत्र भारत में क्या स्थान है ? न तो उन्हें भारत रत्न दिया गया , न संसद के केंद्रीय कक्ष में उनका चित्र लगाया गया, न संसद के अंदर या बहार उनकी मूर्ति स्थापित की गयी, न उन पर अभी तक कोई बढ़िया फिल्म बने गयी, न उनकी जन्म-शताब्दी मनाई गयी और न ही उनकी जन्म-तिथि और पुण्य-तिथि पर उनको याद किया जाता है जबकि वो इसके सबसे अच्छे उमीदवार थे कम से कम कुछ भ्रष्ट, ढोंगी, और विलासी नेताओ से तो अच्छे तो थे ही पर ये हमारे देश का एक तरह से दुर्भाग्य ही है की माँ भारती के सच्चे पुत्र को आज विदेशी कथित भारतीय सरकार श्रधांजली भी नहीं देती | आइये हम जानते है अपने वीर सावरकर के बारे में कुछ

श्री विनायक दामोदर सावरकर वर्तमान काल में महान क्रान्तिकारियो में से एक थे | उन्होंने अपना सारा जीवन भारत माता की सेवा में समर्पित कर दिया | वह महान स्वतंत्रता सेनानी थे | उनका जन्म 28 मई, 1883 को जिला नासिक के भगुर नमक ग्राम में हुआ | वह शिवाजी, राणा प्रताप और सदाशिव राव भाऊ की जीवनियो से अत्यंत प्रभावित हुए| उन्होंने 1901में मेट्रिक की परीक्षा उतीर्ण की | उसी वर्ष उनका विवाह हुआ |फिर उन्होंने पूना के फर्गुसन कालेज में प्रवेश लिया | वे वह गीतों की रचना की, जिससे युवाओ को भारत माता के लिए सर्वस्व अर्पण करने की प्रेरणा मिली | अंग्रेजी सरकार ने उनकी पुस्तको पर प्रतिबन्ध लगा दिया |
1905 में अंग्रेजी शासन ने बंगाल का विभाजन कर दिया | सारे देश में क्रांति की ज्वाला भड़क उठी | युवा सावरकर ने bhi इसमें भाग लिया | उन्होंने पूना में विदेशी कपड़ो की होली जलाई | उन्हें कालेज से निकल दिया गया | उन्होंने भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति हेतु एक गुप्त संगठन 'अभिनव भारत' की स्थापना की | उन्होंने बम्बई विश्वविद्यालय से स्नातक परीक्षा उतीर्ण की | अगले वर्ष वे इंग्लैंड में विधिशास्त्र का अध्ययन करने गए | भारत की स्वतंत्रता के लिए उन्होंने वहा आन्दोलन की | वह के भारतीय छात्रो ने इसमें भाग लिया | वे वह बमों का निर्माण करके भारत में पहुचाते |
1
जुलाई 1909 को एक पंजाबी युवक मदन लाल ढींगरा ने कर्जन वेली का वध किया और उसी वर्ष वीर सावरकर के एक साथी ने जैक्सन का नासिक में वध किया | अंग्रेजी सरकार का विश्वास था की उनका वध सावरकर की प्रेरणा से हुआ | इसीलिए उन्हें इंग्लैंड में गिरफ्तार कर लिया गया | उनके बड़े भाई श्री गणेश सावरकर को जैक्सन की हत्या का दोषी करार दिया गया और उन्हें बीस वर्ष की सजा सुनाई गयी | सावरकर ने विधि की परीक्षा तो उतीर्ण की पर उन्हें अंग्रेजी सरकार से संघर्ष करने के कारण उपाधि प्रदान न की गयी| उन पर मुकदमा चालाने के लिए भारत में भेजने का निर्णय लिया गया | एक समुद्री जहाज भारत की ओर रवाना हुआ | रस्ते में ही वीर सावरकर गहरे समुद्र में चुपचाप कूद गए और तैर कर फ़्रांस के तट पर पहुच गए | फ़्रांसिसी सरकार ने उन्हें अंग्रेजी सरकार के हवाले कर दिया | भारत में उन्हें अनेक घटनाओ में दोषी करार कर दिया गया | 24 दिसम्बर, 1910 को उन्हें 50 वर्ष की सजा सुनाई गयी | उन्हें अंडमान द्वीप में "कालापानी" की सजा हुयी | अंडमान में उनसे क्रूर व्यव्हार किया गया| जिससे की उनका स्वस्थ्य बिगड़ गया और 1920 में तो ऐसी स्थिति थी की उनकी जीर्ण-अवस्था के कारण उन्हें रिहा करने की मांग की| उसके पश्चात उन्हें अंडमान से रिहा कर भारत के जेल में बंदी किया गया | २७ साल की कठोर जेल यात्रा के पश्चात उन्हें 1937 में रिहा किया गया |
वीर सावरकर से कई बार कांग्रेस में शामिल होने का आग्रह किया गया परन्तु उन्होंने स्वीकार नहीं किया क्यूंकि वो हिंदुत्व के लिए कार्य करना चाहते थे | वह हिन्दू महासभा में शामिल हुए और सात वर्ष तक इसके अध्यक्ष भी रहे | उनहोंने भारत के स्वतंत्रता के लिए भी संघर्ष जारी रखा | इन सात वर्षो में कठोर परिश्रम के कारण उनका स्वस्थ्य बिगड़ गया | अत: चिकित्सको की सलाह पर वह सक्रिय गतिविधिओ से दूर रहे |
जब वह रोगग्रस्त अवस्था में थे, तो भारत स्वतंत्र हुआ| परन्तु देश का भारत और पाकिस्तान के रूप में विभाजन हुआ | इससे वीर सावरकर बहुत दुखी हुए, परन्तु उन्हें संतोष हुआ की अंत में भारत सवतन्त्र हुआ |
26,
फरवरी 1966 को अपनी लोक्लिला पूरी करने के पश्चात् वह सदा के लिए हमारे से बिछुड़ कर परमगति को प्राप्त हुए 

| भारतीयों ने अपना एक महँ देशभक्त व् क्रन्तिकारी खो दिया |

Saturday, May 5, 2012

अजीब देश है हमारा भी.....


अजीब देश है हमारा भी.....

धर्मनिरपेक्षता: यूँ तो इस शब्द का अर्थ है की हमारे देश में सभी धर्म एक साथ एक अधिकार के साथ रह सकते है लेकिन हमारे देश होता है बिलकुल इसके उल्टा आज धर्म निरपेक्षता का दुरूपयोग खुलेआम कुछ लोगो और सत्ता में बैठे कुछ  दुराचारियो द्वारा किया जा रहा है और मजे की बात तो ये है की देश का बहुसंख्यक  वर्ग  हिन्दू इस मामले पर आँख मुड़े हुए है उसे जरा सा भी इस बात का अहसास नहीं है की अगर इस दुरूपयोग को न रोका गया तो आने वाले दिनों में हिन्दुओ की  दशा तरस खाने वाली हो जाएगी, धर्मनिरपेक्ष होना अच्छी बात है लेकिन धर्म के प्रति उदासीन होना गलत बात है. मेरे दिमाग में रह रह कर के प्राचीन यूनान के स्पार्टा साम्राज्य के समाज व्यवस्था की याद आ जाती है जहा पर कुछ हजार स्पार्टन लाखो की संख्या में स्पार्टा में बसे  "हैलोट" पर राज्य करते थे. हजारो में बसे स्पार्टन कानून और नियम बनाते और हैलोट बेचारे बस काम और मेहनत करके खा पीके सो जाते थे और उनका यही दिनचर्या बन गया था नतीजा ये हुआ की वो गुलामो की जिंदगी बिताने लगे और उनका जीवन दोयम दर्जे के गुलामो की तरह हो गयी थी जिन्हें अपने अधिकार और अपने देश के बारे में कुछ बोलने का अधिकार ही नहीं था उनका और वो एक आम नागरिक से धीरे धीरे गुलाम बन गए जबकि वो संख्या में राज्य करने वाले स्पार्टन से कई गुना अधिक थे. ये एक आदर्श उदाहरण हो सकता है उनके लिए जो अपने अधिकारों का उपयोग नहीं करते कुछ ऐसी ही समस्या हमारे हिन्दू भाइयो के साथ है उनके लिए अधिकारों की बात करना अपना समय बर्बाद करना या बकवास करने जैसा है और बोलने पर बोलते है की हमारे बाप का क्या जायेगा सच भी है हमारे बाप का कुछ नहीं जायेगा क्यूंकि वो तो अपनी जिंदगी आजाद देश में जी रहे है लेकिन क्या हम और क्या हमारी आने वाली पीढ़ी आजाद रहेगी. अगर आपको  लग  रहा है की मैं बस ऐसे ही बकवास कर रहा हु तो आप खुद ही देख लीजिये की आने वाले दिनों में हमारे साथ क्या क्या हो सकता है |

1) अभी कुछ दिन ही पहले हैदराबाद के अपने को  धर्मनिरपेक्ष ( सेकुलर) कहने वाले MIM पार्टी के MLA  अकबरुद्दीन ओवैसी है की उन्होंने  ये मांग की थी  कि हैदराबाद के भाग्यलक्ष्मी मंदिर में घंटी नहीं बजनी चाहिए क्यूंकि घंटी कि आवाज मुस्लिमो के लिए हराम माना जाता है और हैरानी कि बात  ये है कि हमारी केंद्र सरकार से आग्रह करने पर हमारी महान सेकुलर सरकार ने घंटी बजने पर रोक भी लगा दी थी

2) इन्ही अकबरुद्दीन ओवैसी ने यह भी मांग कि थी कि रामनवमी के दिन कोई जुलुस न निकली जाये इससे माहौल बिगड़ने का डर है

3) इन मुस्लिमो कि हिम्मत इतनी बढ़ गयी है कि उन्होंने रामनवमी के जुलुस का बदला लेने  के लिए एक बेजुबान और प्रकृति में ममता कि साक्षात् मूर्ति गाय को काट के एक पास के मंदिर में फेक दिया और झड़प शुरू हो गया और मुस्लिम पहले से ही तैयार बैठे थे और हम कुछ नहीं कर पाए

4) पाकिस्तान से आये हिन्दुओ को सरकार भारत में रखना नहीं चाहती और बंगलादेश के करीब 3 करोड़ मुस्लिम और हाल ही में बर्मा से भाग कर आये करीब 500 शरणार्थियो  को जगह और भोजन दोनों दिया जा रहा है

5) अगर कोई हिन्दू किसी और धर्म के खिलाफ उपर के किसी भी कार्य को अंजाम दे देता है तो लगता है वो एक राष्ट्रीय मुद्दा बन गया है और सतासीन के एक नेता जो कि राष्ट्रीय कुत्ते का का ख़िताब पा चुके है लगते है भौकने लेकिन उपर के किसी भी मुद्दे पर बेचारे ने कही अँधेरे में जाके मुह काला  करना ही उचित समझा

अब कोई बताएगा कि अपनी अपनी श्रद्धा से पूजा करना और जुलुस निकलना भी मुस्लिम बहुल इलाको में गुनाह हो गया है या फिर मुस्लिम इन इलाको को पाकिस्तान और सउदी अरब मान बैठे है जहा दुसरे धर्म कि उपासना करना एक गुनाह ही माना जाता है अगर ये दोनों में से कोई भी है तो ये मुस्लिमो के लिए बहुत ही नुकसान करने वाली बात है वो यहुदियो वाली काम न करे जिसके चलते पुरे यूरोपे से यहुदियो का सफाया हो गया और आज भी वो हाथ पर गिन ने लायक ही बचे है, बार बार हिन्दू मुस्लिम भाई भाई बोलने वाले सेकुलर नस्ल के संकर समाज से मैं बस इतना पूछना चाहता हु कि क्या वो इन सब घटनाओ के बाद भी ऐसा बोलने का हौसला रखते है अगर हा तो उन सभी सेकुलर नपुन्सको को चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए कम से कम उनकी कायरपन तो किसी को पता नहीं चलेगी वैसे भी गलती हिन्दुओ कि है उनकी मानसिकता ही गुलामो वाली हो गयी है बस कमाओ और खाओ भाई राजनीती और अपने अधिकार कि बात करना हमारे बस कि बात नहीं है, और तो और उस सत्तासीन पार्टी को तो हमें सीधा भारत छोडो का ज्ञापन देना चाहिए उन्हें भारत में ही रहने का कोई अधिकार नहीं है, उपर के सभी उदहारण से हम क्या समझे कि हमारी सरकार हमसे ज्यादा महत्व मुस्लिमो को देती है या फिर हमें अपने अधिकारों के प्रति सचेत ही नहीं है. अभी भी बहुत समय है हम चेत गए तो अच्छा है नहीं तो फिर वही होगा जो अभी से हमें कही कही मुस्लिम बहुल इलाको में देखने को मिल जाता है.