Friday, April 10, 2015

दगाबाज नेहरु लम्पट नेहरु

भारत-चीन युद्ध: नेहरू-मेनन ने देश को छला, भारतीय महिलाओं को लूटा और वामपंथियों ने चीन का बाहें फैला कर स्‍वागत किया।‪#‎TheTruIndianHistory‬
संदीप देव। वामपंथी और कांग्रेसियों के खून में जो गद्दारी दिखती है, देश में उसका सबसे बेहतरीन उदाहरण सन 1962 में हुआ भारत-चीन युद्ध था, जिसमें नेहरू ने देश को छला और भारत की कम्‍यूनिस्‍ट पार्टियों ने चीन का बाहें फैलाकर स्‍वागत किया था।
अक्‍टूबर 1962 में चीनी सेना ने मैकमोहन रेखा पार कर भारत पर आक्रमण कर दिया था। भारतीय सेना युद्ध के लिए किसी भी तरह तैयार नहीं थी।, उसके अस्‍त्र-शस्‍त्र पुराने थे। उस समय रक्षा मंत्री कृष्‍णा मेनन थे। नेहरू सरकार ने उस वक्‍त इतना बड़ा घाेटाला किया था कि आप चौंक जाएंगे। कागज व नक्‍शे में चीन की सीमा तक सड़क का निर्माण दिखाया गया था, सड़क निर्माण का फंड भी गायब था, लेकिन जब सैनिक वहां पहुंचे तो पाया कि नक्‍शे में जहां सड़क दिखाई गई है, वहीं कभी सड़क बनी ही नहीं।
तो फिर सवाल उठता है कि सड़क निर्माण पर तो रकम खर्च की गई थी, उसे कौन डकार गया। आज तक 60 साल के शासन में किसी सरकार ने इसकी जांच क्‍यों नहीं कराई है। मेरी बातों पर भरोसा न तो तो आप अक्‍टूबर 1962 का अखबार उठा कर देख लीजिए। बनारस के नागरी प्रचारिणी सभा में 1928 से सारा अखबार मौजूद है। मैंने वहीं से इसे नोट किया है। आपको जानकर आश्‍चर्य होगा कि नेहरू सरकार के समय सेना की हालत बेहद खस्‍ताहाल थी। सरकार का कहना था कि सेना का क्‍या काम है। खाली समय में सेना टमाटर आदि की खेती करे तो ज्‍यादा उचित होगा।
चीन ने जब आक्रमण कर दिया तो नेहरू सरकार ने जनता को लूटने का मन बनाया और घोषणा की कि सेना के पास अस्‍त्र-शस्‍त्र नहीं है और न ही सरकार के बजट में इसे खरीदने के लिए धन है। माताएं-बहने घर से बाहर आएं और अपना-अपना जेवर युद्ध के लिए दान करें। जगजीवनराम जैसे बड़े कांग्रेसी नेता सभा कर कर महिलाओं से जेवर मांग रहे थे।
बनारस की उनकी सभा में जेवरों का ढेर लग गया था। उनके भीख मांगने पर भारत की महिलाओं ने खुल कर अपने आभूषणों का दान दिया, लेकिन आपको आश्‍चर्य होगा कि वह आभूषण भी कई जगह स्‍थानीय कांग्रेस कमेटी के सदस्‍यों ने डकार लिया। हल्‍के जेवरात तो सरकारी खजाने में जमा कराए गए और भारी-भारी आभूषण कांग्रेस कमेटी के सदस्‍यों ने अपनी बीबी और बहनों के लिए या फिर उसे बेच कर धन कमाने के लिए गायब कर दिया था।
अखबार की रिपोर्टिंग आप देखेंगे तो उस वक्‍त जनता में इसे लेकर गजब का आक्रोश था, लेकिन हमारे वामपंथी इतिहासकारों ने इतिहास की पुस्‍तकों में न इस घोटाले का और न ही उस जन आक्रोश का ठीक से वर्णन ही नहीं किया है। आपको आश्‍चर्य होगा कि कृष्‍णा मेनन रक्षा मंत्री थे, लेकिन कभी भारत-चीन सीमा पर वह गए ही नहीं थे।
अखबार मेनन को हटाने की मुहिम चला रहे थे, लेकिन लोग दूसरी बात कह रहे थे। लोग कह रहे थे, '' क्‍या नेहरू बच्‍चे थे जो मेनन के बहकावे में आ गए। वह देश के प्रधानमंत्री हैं और सारी जिम्‍मेवारी उनकी है। अपने मंत्रीमंडल के सदस्‍यों के काम का पता यदि प्रधानमंत्री नहीं रखेगा तो फिर ऐसे प्रधानमंत्री का क्‍या काम।'' जैसे-तैसे मेनन से इस्‍तीफा लिया गया ताकि नेहरू के प्रति बढ रहा जनआक्रोश कम किया जा सके। लोगों ने कहा, ''चलो मेनन की बली चढा कर नेहरू ने स्‍वयं को बचा लिया। नेहरू की गददी तो बच गई, पर देश बचे तब तो।''
दूसरी तरफ देशद्रोही वामपंथी थे। भारत की सभी कम्‍यूनिस्‍ट पार्टियां यह झूठा प्रचार करने में जुटी थी कि ''चीन ने हमारे देश पर आक्रमण नहीं किया है। वह अपनी ही जमीन पर आगे बढ़ रहा है। अंग्रेज अधिकारी मैकमोहन ने झूठी व काल्‍पनिक रेखा खींच कर चीन की जमीन भारत में मिला दी थी, जिसे चीन ले रहा है तो कौन सा गुनाह कर रहा है। चीन अपनी जमीन पर सेना का मूवमेंट कर रहा है। इससे देश को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।''
अखबार ने लिखा था, ''रुस्‍तम सटीन के नेतृत्‍व में कम्‍युनिस्‍टों का एक दल नक्‍शे लेकर बाजार में दुकान दुकान जनता को समझा रहा था कि चीन ने आक्रमण नहीं किया है। वह अपनी सीमा के भीतर सेनाओं को सक्रिय कर रहा है।चीन ने भारत पर आक्रमण नहीं किया है, बल्कि भारतीय सेना ही चीन के क्षेत्र में घुस गई है।'
कैंप पर जनता सैनिकों का उत्‍साहवर्धन करने के लिए जाती थी। जनता का आभार व्‍यक्‍त करते हुए मुगलसराय कैंप के एक कैप्‍टन ने कहा था, '' आपने यह माला किसी सैनिक के गले में नहीं, वरन एक जीवित शहीद के गले में डाली है। हम सब शहीद होने के लिए बॉर्डर पर जा रहे हैं। जब हमारे पास आधुनिक हथियार ही नहीं हो, जब नक्‍शे में सड़क हो और जमीन पर वह गायब हो तो ऐसे में हम क्‍या कर सकते हैं। हम तो उसे तलाशते ही रह जाते हैं और वह हमें घेर कर हम पर वार कर देता है। ऐसे में शहीद होने के अलावा हमारे पास कोई चारा ही नहीं है।' कैप्‍टन ने यहां तक कहा था, यह हमारी हताशा नहीं बोल रही है, बल्कि अपने नेताओं के कमीनेपन पर हमारा आक्रेश है। शायद आपको यह आक्रेश न हो क्‍योंकि आप लोग जमीनी हकीकत से वाकिफ नहीं हैं।''
चीन ने बोमडिला तक का सारा क्षेत्र अपने कब्‍जें में ले लिाय और एक तरफा युद्ध विराम की घोषणा कर दी। बेशर्म नेहरू ने कहा, '' चीन ने जिस क्षेत्र पर कब्‍जा किया है, वह 'नो मैन लैंड' है। वह एकदम उजाड़ है।'' जनता ने जबरदस्‍त प्रतिक्रिया दी। जनता का बयान देखिए, '' नेहरू के हिसाब से तो भारत में बिना आदमी का घर और बिना पानी का नहर चीन जहां भी देखेगा हथिया लेगा, क्‍योंकि वह भी तो उसके लिए 'नो मैन लैंड' ही होगा।''
देशद्रोही कम्‍यूनिस्‍टों ने कहा, ''जीतने वाली सेना कभी एकरफ युद्ध विराम करती है, लेकिन चीन ने किया है। इसी से साबित होता है कि चीन हमलावर नहीं था, बल्कि वह अपनी जमीन लेने आया था, जो भारत के कब्‍जे में था।'' सोचिए कांग्रेस और कम्‍यूनिस्‍ट, आज यही दोनों देशद्रोही पार्टियां और इसकी विचारधारा के लोग हमें देशभक्ति सिखला रहे हैं, टीवी पर बैठकर प्रवचन दे रहे हैं।
आपको-हमको इतिहास की टेस्‍टबुक में इनकी घटिया कारास्‍तानी नहीं मिलेगी, क्‍योंकि एनसीईआरटी एवं अन्‍य टेक्‍सटबुक तो कांग्रेसी व वामपंथी चापलूस इतिहासरों ने लिखा है। लेकिन उस वक्‍त के सभी अखबार दस्‍तावेज है, जो आज भी देश के विभिन्‍न पुस्‍तकालयों में मौजूद हैं और जिन्‍हें हर हाल में पलट कर नए इतिहास को लिखने की जरूरत है। मैंने कुछ घटनाओं को तो नोट कर लिया था, लेकिन इसमें इतना श्रम, समय और पैसा चाहिए कि एक अकेला आदमी पूरी तरह से बिखर जाएगा। यह तो संगठित रूप से किया जाने वाला प्रयास है। देखते हैं यह कैसे होता है। मेरी PMO India Narendra Modi से अपील है कि वह देश के इतिहास के पुनर्लेखन को प्राथमिकता दें, क्‍योंकि हमारे बच्‍चे देशद्रोहियों को देशभक्‍त के रूप में पढ़ पढ़ कर गुमराह हो रहे हैं।

Tuesday, March 24, 2015

स्वदेशी अपनाओ, देश बचाओ

पेप्सी बोली सुन कोका कोला !
भारत का इन्सान है बहुत भोला।
:
विदेश से मैं आयी हूँ,
साथ में मौत को लायी हूँ ।
:
लहर नहीं ज़हर हूँ मैं,
गुर्दों पर गिरता कहर हूँ मैं ।
:
मेरी पी.एच. दो पॉइन्ट सात,
मुझ में गिरकर गल जायें दाँत ।
:
जिंक आर्सेनीक लेड हूँ मैं,
काटे आतों को, वो ब्लेड हूँ मैं ।
:
हाँ दूध मुझसे सस्ता है,
फिर पीकर मुझको क्यों मरना है ।
:
540 करोड़ कमाती हूँ,
विदेश में ले जाती हूँ ।
:
मैं पहुँची हूँ आज वहाँ पर,
पीने को नहीं पानी जहाँ पर ।
:
छोड़ो नकल अब अकल से जीयो,
और जो कुछ पीना संभल के ही पीयो ।
:
पेप्सी बोली सुन कोका कोला !
भारत का इन्सान है बहुत भोला।
:
विदेश से मैं आयी हूँ,
साथ में मौत को लायी हूँ ।
:
लहर नहीं ज़हर हूँ मैं,
गुर्दों पर गिरता कहर हूँ मैं ।
:
मेरी पी.एच. दो पॉइन्ट सात,
मुझ में गिरकर गल जायें दाँत ।
:
जिंक आर्सेनीक लेड हूँ मैं,
काटे आतों को, वो ब्लेड हूँ मैं ।
:
हाँ दूध मुझसे सस्ता है,
फिर पीकर मुझको क्यों मरना है ।
:
540 करोड़ कमाती हूँ,
विदेश में ले जाती हूँ ।
:
मैं पहुँची हूँ आज वहाँ पर,
पीने को नहीं पानी जहाँ पर ।
:
छोड़ो नकल अब अकल से जीयो,
और जो कुछ पीना संभल के ही पीयो ।
:
बच्चों को यह कविता सुनाओ,
स्वदेशी अपनाओ, देश बचाओ ।

-ठलुआ क्लब

Sunday, March 15, 2015

OPEN LETTER TO MR. UNNIKRISHNAN



OPEN LETTER TO MR. UNNIKRISHNAN 
Dear Mr. Unnikrishnan,
You do not know me but I owe you a great debt. It sits on my shoulder like the body of a much loved brother, it shrouds my heart and casts a pall on all that I do….I know not how to repay you and that is my biggest agony. I see you as you speak to the media without a quaver in your voice, I see your wife with a broken heart and I am lashed with a pain that has no voice. Your son died saving my son and it weighs me down…speak to me and ask for something in return…I will give you my blood and the very marrow from my bone! Forgive me as I am the cause of your brilliant son fading…I did not see the enemy neither did I recognize it and when it attacked me with the ferocity of a thousand lions, I could only run and try to hide. I left the battle to your son and he has gone to the soldier’s paradise. He has done his duty and asked for nothing and I am cursed.
I am cursed as I lie at night wrestling with sleep as images of the dead and dying call out to me. I am cursed when I see the beautiful face of your son. I am cursed when I look at the face of grief that is your wife. I look at my sleeping son lying safe in his bed and I am overwhelmed. I cannot begin to imagine what courage it takes you to get up in the morning and face another day.
If it gives you any small iota of relief, let me tell you that it is the sacrifice of soldiers like your son which make me hold up my head high. It ignites a feeling of great self esteem and it is what makes me hopeful. If we have men like your son still left in India , then we will come into our own. These men show me a bright, shining vision of the future and make me a believer.Our fat, ugly, disillusioned sorry caricatures who are our politicians who suck out hope and glory and tarnish all that is good in our world fail in their task of destroying our faith.Men like Major Sandeep who live by their ideals unflinchingly are our saviours. We see them and recognize in them a pure spirit burning bright. They are our beacons…they shine forth like our star of hope and we can weather all storms.
Mr. Unnikrishnan, you are the exceedingly brave father of a lion among men. In your grief, know this that all Indians have seen him and his faith and his love for our country…in his death he has become immortal.
Death will come to us all. It will carry us away leaving only our loved ones sorrowful…your son’s funeral has made a whole nation grief-stricken. It has made all Indians say a prayer for him and his family. It has made us sit up and has lit a fire under us. He singlehandedly silenced Mr. Raj Thackeray with his deed. This sorry politician’s career is over before it began…the so-called leader of the Marathi hides his face at home when a soldier rams home his point in so direct a fashion. Raj Thackeray was cowering beneath his bed when “his” Mumbai was burning and the men in uniform fought and gave up their lives for an India they unite and protect. No talk, no rhetoric just a heroic fight to the finish!
Mr. Unnikrishnan, if we have more men like your son then India WILL become a superpower.
I salute you and your family.
Godbless you all.
An indebted Indian.
Indian Army Fans

Monday, February 9, 2015

बजार में मिल रहे है खतरनाक अनुवांशिक संशोधित भोजन

बजार में मिल रहे है खतरनाक अनुवांशिक संशोधित भोजन !!

(भारत की जनता को मारने का प्लान)


क्या पूरी दुनिया में सिर्फ भारत के लोग ही मिले है एक्सपेरिमेंट करने के लिए लिए?? मित्रो, आज एक ऐसा मुद्दा उठा रहा हूँ जो भारत की जनता के स्वस्थ्य को तै करेगा |

जेनेटिक-मॉडिफाइड फसल हमारे देश में बेचने की पूरी साजिश रची जा चुकी है और MNC लॉबी यह कहकर देश की जनता को गुमराह कर रही है की इसके कोई भी नुक्सान नहीं है |

अगर इस फसल का कोई भी नुक्सान नहीं है तोह क्यूँ Europe में GM(Genetic Modify) खाद्य पदार्थ बंद है ? क्यूँ अमेरिका में बंद है ?

जेनेटिक मॉडिफाइड वो फल सब्जी या अनाज होता है जिका DNA बदल दिया जाता है ताकि ज्यादा से ज्यादा फसल हो सके |

DNA वो पदार्थ होता है जो इंसान को इंसान बनता है और पशु को पशु . पशुओ और इंसानों में मुश्किल से 5% DNA का फर्क होता है |

आज हमें नहीं पता की DNA बदले जाने पर अनाज किस प्रकार का उगा है और लम्बे समय तक उसका मानव जाती पर क्या प्रभाव पड़ेगा | इसिलए यह सभी विदेशी लोग अपने लालच के चक्कर में सारा अनाज भारत को बेचने में लगे है और भारत की चोर लुटेरी कांग्रेस सरकार भी इनका साथ दे रही है |

अगर भारत में ऐसा ही चलता रहा तोह भविष्य में वो वक्त भी भारत देख सकता है जब पूरा देश बीमारियों से ग्रसित होगा और इलाज मिलने से पहले पूरे देश की जनता बिमारी के कारण सब कुछ खो दे अपने प्राण भी |

DNA के साथ खेलना प्रकृति का काम है इंसानों का नहीं | अगर इंसान प्रकृति के काम में ऊँगली करेगा तोह इसके परिणाम बहुत भयानक होंगे , इतने भयानक की इंसान कल्पना भी नहीं कर सकता

हमारे देश में 100% शुद्ध organic खेती करी जा सकती है
परन्तु हमारे देश की भ्रष्ट सरकार एसा होने नहीं देती। आप प्रश्न करेंगे क्यों? इसका जवाब बहुत ही सरल है। हमारे देश की सरकार कीटनाशक तथा ज़हरीले केमिकल्स बनाने वाली विदेशी कंपनियों से मोटा माल खाती है। लाखों करोड़ो का टैक्स तो वसूलती ही है सरकार साथ मे दो नंबरी का पैसा भी खाती है इन विदेशी कंपनियों से। यह भ्रष्ट मंत्री जो खुद 100% शुद्ध आर्गेनिक भोजन खाते हैं वे देश की करोड़ो जनता को ज़हरीला भोजन खाने पर मजबूर करते हैं तथा देश की जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ करते हैं।
जहाँ अमेरिका जैसे देश में सरकार द्वारा सीमा निर्धारितहोती है की फल और सब्जियों में कितनी मात्रा तक कीटनाशक तथा pesticides डालें जा सकते हैं वहीँ भारत में इस प्रकार की कोई सीमा निर्धारित नहीं करी गई है।जहाँ अमेरिका में 100% organic खेती करने वाले किसानो को अमेरिका की सरकार Subsidy देती हैं वहीँ भारत में किसानो को ज़हरीले chemicals और कीटनाशक प्रयोगकरने के लिए सरकार द्वारा किसानो को मजबूर किया जाता है।यह ज़हरीले chemicals हमारे खाद्य चक्र में घुस कर कैंसर , दमा , मानसिक रोग आदि पैदा करते हैं .
आखिर कैसे होती है organic खेती? क्या है यह organic खेती? किस प्रकार हमरी जान केसाथ खिलवाड़ हो रहा है? यह सब जान ने के लिए क्लिक करें -
http://www.youtube.com/watch?v=Onp9YZ8_GXM
http://www.youtube.com/watch?v=2qNDu28tbkY

क्यों राजीव दीक्षित जी को कभी भी मीडिया का समर्थन नहीं मिला?

Sunday, February 8, 2015

अमेरिका की संकीर्ण विदेश नीति

सीरिया और इराक की घृणित इस्लामी आतंकवाद और हिंसा के साथ भारत की सहिष्णुता को घसीटने के लिए ओबामा के मूर्खतापूर्ण टिप्पणी पर वाशिंगटन पोस्ट के स्तम्भकार ने ओबामा को गहरी लताड़ लगायी है. उन्होंने कहा की एसी कौन सी मुसीबत भारत में आन पड़ी है की वे सीरिया और इराक के साथ भारत को घसीट रहे हैं? यह साफ है की ओबामा भारत का अपमान कर रहे हैं और इसलिए की भारत एक हिंदू देश है. भारत धरती पर दूसरा सबसे बड़ा मुस्लिम देश है और इसके बाबजूद आप भारत के पीछे पड़ जाते हैं. आप यह बताना चाहते हैं की वहाँ का हर आदमी गलत कर रहा हैं. वे कोई गलत काम नहीं कर रहे हैं. आपका भाषण तुच्छ और अप्रिय है.


इसी बिच खबर आ रही है मोदी ओबामा बोले तो भारत अमेरिका के अच्छे भले मजबूत होते रिश्ते के बिच दरार पैदा करने वाला कोई विदेशी ताकत नहीं बल्कि बरसों से हमारे प्यारे हिन्दुस्तान को तबाह और बर्बाद कर रही कैथोलिक इटालियन सोनिया ही थी. कैथोलिक सोनिया अपने गद्दार गैंग के साथ राष्ट्रपति ओबामा से जब मिली थी तभी उसने भारत में ईसाईयों के विरुद्ध हिंदुओं द्वारा किये जा रहे हिंसा, चर्च में तोड़फोड़, घर वापसी आदि शिकायतों का जहर उगला था जिसका प्रकटीकरण अगले दिन ओबामा के सीरी फोर्ट में दिए गए भाषण में हुआ था, हालाँकि, व्हाइट हाउस ने स्पष्टीकरण देते हुए इसे भारत के विरुद्ध नहीं बल्कि सबपर लागू होने वाला सामान्य बात कही थी, परन्तु परसों फिर ओबामा ने भारत में धार्मिक असहिष्णुता की बात कर यहाँ तक कह दिया की गाँधी होते तो बे शर्मिंदा होते. ये सेकुलर देशद्रोही अपने राजनितिक स्वार्थ और हिंदू विरोध के आलम में फिर से भारत को पुरे विश्व में बदनाम करने का षड्यंत्र कर रहे हैं. इसके पहले ये पुरे विश्व को यह जता चुके हैं की भारत में केवल एक ही धार्मिक स्थल टुटा है और वो है तथाकथित बाबरी मस्जिद और एक ही दंगा हुआ है और वो है मुस्लिमों के विरुद्ध गुजरात दंगा जबकि सच्चाई यह है की आजादी के बाद भी सैकड़ों मंदिर सिर्फ कश्मीर में ही तोड़ दिए गए हैं और हजारों दंगे आये दिन होते रहे हैं. दूसरी बात, मुझे लगता हैं दिल्ली में चर्च पर हमलों में कजरिया गैंग का हाथ नहीं ये गद्दार सोनिया और कांग्रेसियों का ही हाथ होगा ताकि वे हिंदुओं के विरुद्ध ईसाई ओबामा को भडका सकें. ज्ञातव्य हैं चर्च पर हमला करने वाले सभी ईसाई ही थे जो अब गिरफ्त में हैं और उन्होंने जानबूझकर भगवा झंडा वहाँ लगाया था ताकि आरोप हिंदुओं पर जाये. भ्रष्ट और गद्दार सेकुलर सिर्फ वोट बैंक के लिए हिंदुओं के धर्मान्तरण की खुली छूट देने वाले और मौन रखने वाले उन धर्मान्तरित हिंदुओं के घर वापसी पर जैसा शोर मचाते हैं वो खतरनाक हैं. आखिर ये धर्मान्तरण विरोधी कानून और समान नागरिक संहिता का विरोध क्यों करते हैं. सीधी से बात हैं की ये तथाकथित सेकुलर सिर्फ भ्रष्ट ही नहीं बल्कि हिन्दुओ और हिन्दुस्तान के दुश्मन और गद्दार भी है.

साभार: फेसबुक से 


Tuesday, January 20, 2015

दुनिया का इतिहास पुछता/ श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी


दुनिया का इतिहास पुछता,
रोम कहाँ, युनान कहाँ?
घर_घर में शुभ_अग्नि जलाता,
वह उन्नत इरान कहाँ है ?
बुझे दीप पश्चिमी गगन के,
व्याप्त हुआ बर्बर अंधियारा ।
किंतु, चीर कर तम की छाती,
चमका हिन्दुस्तान हमारा ।
शत_शत आघातों को सहकर,
जीवित हिन्दुस्तान हमारा ।
जग के मस्तक पर रोली सा,

शोभित हिन्दुस्तान हमारा ।

Tuesday, January 13, 2015

भारत का उन्नत समाज और विश्व भाग -II

आज भले ही विज्ञान कितना भी तरक्की कर ले लेकिन आज के आधुनिक विज्ञान भी वैदिक विज्ञान के आगे बौना ही नजर आता है लेकिन मानने वाले आज भी मानते है की वेदों में वर्णित विज्ञान केवल काल्पनिक है, आज से  कुछ शताब्दी पहले पृथ्वी के चक्कर लगाने वाले मार्ग को सही बताने वाले पश्चिमी विचारको को पश्चिमी समाज जला कर मार डालता था लेकिन वैदिक काल से ही हम सूर्य भगवान के उतारायण और दक्षिणायन गमन को बताने वाला वैदिक विज्ञान आज के लिए मिथक है बस जब की हम सदियों से सूर्य के मकर रेखा में आने का पर्व मकर सक्रांति मानते आये है और आधुनिक विज्ञान भी आज ये मानता है लेकिन कुछ जाहिल लोग अभी भी वैदिक विज्ञान पर ऊँगली उठाते हुए नजर आते है जो की पश्चिम के रटे रटाये विज्ञान को पढ़ के खुद को एक वैज्ञानिक से खुद को कम नहीं मानते l

आज से 100 साल पहले भी अगर को बोलता की अमेरिका में होने वाले कुछ घटना को हम भारत में बैठ के देख सकते है तो लोग पागल घोषित कर देते और आज वो सच्चाई है जो विज्ञान दुनिया में आज लोकप्रिय है जिससे हम कही भी होने वाले खेल को अपने घर बैठे आँखों से देखते है लेकिन महाभारत के युद्ध में संजय के द्वारा आँखों देखा हाल महाराज धृतराष्ट्र को सुनाना उनको मिथक लगता है क्या ये वैदिक समय के उन्नत विज्ञान का चमत्कार नहीं है जो की हमारे धार्मिक ग्रंथो में भी वर्णित हैl उस समय के अमोघ अस्त्र और ब्रम्हास्त्र जिस से की पुरे श्रृष्टि की विनाश होने की बात कही गयी है वो ही आज का परमाणु और अणु बम है लेकिन फिर भी दिमाग से खाली लोग अभी भी उन पर सवालिया निशान ही लगाते है की वो सब काल्पनिक बाते है, कल्पना भी कभी भी असामान्य नहीं होती कल्पना वही करता है जो सामने देखता है लेकिन पश्चिम और लाल बंदरो के पढाये गए शैक्षिक दस्तावेजो से हम इतने मुर्ख हो गए है की हमें सही और गलत में अंतर पता नहीं चलता l
विमानों का वर्णन वैदिक काल से ही उल्लेखित है और अमेरिका भी मानता है की वैदिक काल के विमान कला आज के विमान विज्ञान से काफी आगे है जो मन के गति से उड़ान भरते थे लेकिन आज विमान को उड़ते देख के भी लोग ये नहीं समझ पते की क्यों नहीं वैदिक कल के भी लोग विज्ञान कला से भली भांति परिचित थे l विमान कला ही क्यों अन्तरिक्ष विज्ञान से लेके गणित के कठिन से कठिन प्रमेय भी वेदों में उल्लेखित है और तो और न्यूटन के गुरुत्वकर्षण नियम से बहुत पहले ही भारत के ऋषि महर्षियो ने इस विज्ञान को भली भाति समझते थे और तो और विश्व में पहली सर्जरी से लेकर विकसित चिकित्सा प्रणाली भारत में प्रचलित थी लेकिन आज कल इसी बात पर बहस हो रही है की वो विज्ञान था या बस मिथक ? जो अभी भी इस बात पर संदेह कर रहा हो उसे अपने मानसिक इलाज के लिए तैयार रहना चाहिए क्यूंकि वो सभी तथ्य जो की वेदों में वर्णित है वो आज के आधुनिक विज्ञान से कही आगे है चाहे हो सूर्य से पृथ्वी की दुरी हो या फिर प्रकाश की गति सब वेदों में वर्णित है और आज भी वो सत्य है उन्हें आधुनिक विज्ञान झुठला नहीं सकता और  नहीं वेदों में कही बाइबिल और कुरान की तरह पृथ्वी को चपटा या सपाट नहीं बताया गया है बल्कि हम कह सकते है की आधुनिक विज्ञान भी वेदों की कही बातो को ही सही साबित करते है l लेकिन फिर भी अंग्रेजो के गुलाम उनके नाजायज औलाद भी भी हल्ला करते है की वो वैदिक विज्ञान तथ्यपूर्ण नहीं थे तो फिर अफ़सोस ही होता है इन पढ़े लिखे मूर्खो पर l
सूर्य नारायण के मकर रेखा में प्रवेश करने का पर्व मकर सक्रांति की सबको हार्दिक शुभकामनाये !


Tuesday, January 6, 2015

भारत का उन्नत समाज और विश्व भाग -1

भारतवर्ष को जी भर के लुटने के बाद बाहर के लुटेरो का मन नहीं भरा तो उन्होंने भारत के इतिहास के साथ जबरदस्त छेड़छाड़ किया, ताकि वो भारतवर्ष पर जी भर के शासन कर सके l मुस्लिम शासको ने जहा भारत में धन और पद का लालच के साथ जान से मारने की धमकी के साथ हमारे उपर शासन किया लेकिन उन्होंने भारत के शूरवीरो का मनोबल तोड़ने में विफल रहे क्यूंकि पुरे भारत में उनका शासन स्थापित नहीं हो पाया था उस समय इस्लाम की आंधी पुरे एशिया को अपने कब्जे में ले चुकी थी बस उत्तर-पूर्व में बसे जापान और चीन ही इस आंधी से बचे थे बाकि भारत के पूर्व में बसे इंडोनेशिया और मलेशिया जो की भारत की तरह हिन्दू-बौद्ध धर्म के अनुयायी थे वो पुरे तरह इस्लाम अपना चुके थे लेकिन बस पूण्य भूमि भारत अभी भी इस्लाम को स्वीकार करना दूर उसे अभी भी संघर्ष कर रहा था लगभग 1000 सालो के शासन के बावजूद भारत कभी भी इस्लाम को अंगीकार नहीं कर सका था बस कुछ बुजदिल लोग जो धन और जान के डर से पश्चिम की ओर मुह करके अपने पिछवाड़े को पूर्व की ओर करना सिख गए थे लेकिन फिर भी भारत की मुख्यधारा हिंदुत्व का कोई जवाब नहीं खोज सके l

औरंगजेब के पतन के साथ ही भारतवर्ष पर अंग्रेजो ने अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू कर दी थी क्यूंकि औरंगजेब  अपने पूर्वजो की सलाह के बावजूद वो गलती कर बैठा जो मुग़ल सल्तनत के बाकि बादशाहों ने कभी नहीं किया, औरंगजेब जो की जिन्दा पीर के नाम से मशहूर था उसने समाज में हिन्दू बहुल समाज से दुश्मनी मोल ले लिया और हिन्दुओ का जी भर के दमन किया और उसका फल उसे बहुत जल्दी मिला जब हिन्दू सम्राट शिवाजी महाराज और पश्चिम भारत में सिख साम्राज्य ने उसे कभी भी चैन की सांस नहीं लेने दिया और उसे मरते समय भी कभी चैन नहीं आया और दक्षिण भारत के एक अभियान में उसने अपने अंतिम सांस लिया यह कहना गलत नहीं  होगा की औरंगजेब ने ही भारत में मुग़ल साम्राज्य के लिए ताबूत तैयार किया था जो उसने हिन्दुओ से दुश्मनी मोल ली थी उसके बाकि के पूर्वजो ने हिन्दुओ के दुशमनी के साथ दोस्ती और रिश्ते भी स्थापित करी थी लेकिन जिन्दा पीर बनने की चाहत ने औरंगजेब की हालत ऐसी कर दी की बाद के मुग़ल शासक बस इतना कमजोर बन गए की वो अपनी इज्जत भी न बचा सके उनके सेनानायक समेत उनके वजीरो ने उनकी हालत इतनी कमजोर कर दी की वो आखिर में आधुनिक भारत में अभी भी मुगलों के वंशज चाय बेचते है या फिर भुखमरी के कगार पर है ...... बाकि  का लेख अगले अंक में


Monday, January 5, 2015

देश की गद्दार मीडिया और सेखुलर समाज

जब 2008 में UPA सरकार थी तब नाव से ही आये कुछ तस्करों ने मुंबई में भारी तबाही मचाई थी और उस समय खान्ग्रेस एंड पूरा गैंग इस हमलो को रोकने में नाकाम हो गया था लेकिन अभी भाजपा सरकार ने जिस तरह पूरी तरह से इस तरह के हमले जो की “प्रवासी भारतीय” दिन के होने वाली थी उसे रोका है उससे खतरनाक मंसूबे बनाने वाले तो खिन्न हुए ही होंगे लेकिन खान्ग्रेस एंड गैंग जिस तरह से उस बोट वालो के लिए वकालत कर रही है उसे देख ये यही लगता है की या तो ये गैंग वैसा ही खतरनाक मंसूबे में शामिल थी या फिर उसे बड़ा ही दुःख हुआ की क्यों हमला नहीं हुआ इस देश में ध्यान रहे की वह 12 जनवरी के एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी भी जाने वाले थे l 

अगर उनपर हमला होता तो देश में क्या होता सभी जानते है और अगर प्रवासी भारतीय मेला में अगर हमला होता तो उस में भी काफी बड़ा नरसंहार होता और वो भी प्रवासियों का पुरे भारत का विश्व के सामने ख़राब तस्वीर बन जाती और प्रधानमंत्री जो की इतने मेहनत से लगे है भारत में निवेश का माहौल बनाने में वो सारा माहौल ख़राब हो जाताl आखिर कौन है इन हमलो के पीछे ??? या तो भारत में निवेश रोकने वाले या फिर प्रधानमंत्री की हत्या कर के देश में अराजकता फ़ैलाने वाले ??? और अगर दोनों में से कोई हो लेकिन दोनों के इरादे भारत के लिए सही नहीं है और सबसे बड़ी बात इनकी तरफदारी करने वाली खान्ग्रेस और मिडिया क्यों उनका बचाव कर रही है ?? दो मिडिया समूह ने तो इसके लिए खास कार्यक्रम चलाया NDTV ने इस पर बहस चलायी की वो स्मगलर थे और The Indian Express ने एक आर्टिकल अपने सम्पादकीय पृष्ठ पर इसके लिए खास लेख लिखा की तटरक्षक बल ने पाकिस्तान के मछुवारो की नाव पर हमला करके उसे जला दिया l

और इनके इसी करतूतों की वजह है की इसमें पाकिस्तानी सेना के भागीदारी के बावजूद पाकिस्तान सीमा पर हम पर हमले करता है क्यूंकि उसे पता है की भले ही खान्ग्रेस एंड गैंग सत्ता में नहीं  हो  लेकिन पैसे का वो नमक अदा कर के रहेगीl शर्म आती है देश के इन गद्दारों पर और सबसे ज्यादा आश्चर्य होता है इस देश की निक्कमी जनता की जो इतना सब कुछ खुल्ला देख के भी इन देशद्रोहियों की असलियत नहीं समझ रही l क्या हम इतने मुर्ख है जो की देश के दुश्मन आज देश में खुले आम इस तरह से सरेआम देश को बदनाम कर रही है और हम भेड़ बकरी की तरह उनकी तरफ देख रहे है 

Saturday, January 3, 2015

खुद का पतन करता हिन्दू समाज


भारतीय समाज हमेशा से अपने ज्यादा उदार होने का खामियाजा उठाता आया है लेकिन इससे हमने कोई सिख नहीं लिया हैl प्राचीन काल में जब राजतन्त्र का दौर था और उस समय में राजा जिस धर्म को मानता था उसे जबरन प्रजा पर भी थोपा जाता था लेकिन हमारे भारतीय समाज में ऐसा कोई जबरदस्ती नहीं थी लोग धर्मं और अपने और भी निर्णय के लिए स्वतंत्र थे, ये जोरदार तमाचा है उन कथित पाखंडियो के मुह पर जो अभी सभ्यता और संस्कृति के लिए पश्चिम का अनुसरण करते हैl हमारी मातृभूमि ने दुनिया को कई पंथ दिए बौद्ध धर्म जिसको मानने वाले जी भर के हिंदुत्व को कोसते है लेकिन जिस समय बौद्ध धर्म का उदय हो रहा था तो उसे संरक्षण देने वाले साम्राज्य हिन्दू साम्राज्य थे और खुद तब के हर्यंक वंश के सम्राट बिम्बिसार ने इस धर्म के बहुत बड़े संरक्षक थे लेकिन कुछ मुर्ख लोग अभी भी मुगलों और अंग्रेजो का इतिहास पढ़ कर हिन्दुत्व और हिन्दू समाज को गाली देने से नहीं चुकते बस जरा सोचिये अगर महात्मा बुद्ध यूरोप या अरब में होते तो उनके साथ क्या होता ?? लेकिन झूठा इतिहास पढ़ के गुमराह हुए एक बड़े जन समुदाय को आप कैसे समझा सकते जब उनके दिमाग में जाति पाती का झूठा जहर भर दिया गया हो और बौद्ध पंथ ही क्यों भारत की समृद्ध धरा तो जैन पंथ, सिख पंथ की भी जननी है l इन पन्थो के अलावा भी भारत हमेशा से दुसरे पन्थो के लिए भी शरण स्थली साबित हुआ है l जब इस्लाम अरब समाज में फ़ैल रहा था तो फारस का पुराना धर्म जरथ्रुस्त के अनुयायियों का जबरदस्त नरसंहार हुआ और जो जान बचा के भागे उन्हें भारत की पुण्य भूमि ने ही शरण दिया जिन्हें आज हम पारसी समुदाय  बोलते है और हालत आज ये है की पूरी दुनिया में आज पारसी  बस भारत में ही पाए जाते है l


हम सहिष्णुता के साथ बस एक गलती कर जाते है की अपने साथ होने वाली गलतियो को नजरअंदाज कर देते है जो की अतीत से हमें बार बार सोचने पर मजबूर करती है लेकिन फिर भी हम अपनी गलतियो से बाज नहीं आते l अभी उदाहरण के लिए देखिये कैसे हिन्दू की भावनाओ का मजाक खुद उन्ही के देश में खुद उनकी चुनी सरकार उड़ाती है, जनवरी 2013 में एक फिल्म आई थी “विश्वरूपम” जिसे हमारे देश के बड़े कलाकार कमल हासन ने बनाया था उसमे तालिबान के असली कृत्यों को दर्शाया गया था जिसके चलते हमारे देश के मुसलमानों की भावनाए आहत हो गयी थी और नौबत यहाँ तक आ गई थी की कमल हासन साहब उस समय के खान्ग्रेस सरकार से इतने आहत हो गए थे की उन्होंने देश छोड़ने की धमकी भी दे दी थी लेकिन फिर भी सरकार ने उनसे माफ़ी मंगवाई और साथ में फिल्म के कुछ दृश्य भी हटाई गई फिर फिल्म रिलीज हुई और अभी कुछ दिन पहले एक तमिल फिल्म “शिवम्” में कुछ दृश्यों के ऊपर सेंसर बोर्ड ने ये कहते हुए कैंची चला दी की इससे समुदाय विशेष की भावनाए आहत हो रही है लेकिन उसी सेंसर बोर्ड को PK में कुछ गड़बड़ नजर नहीं आई क्यूंकि वो हिन्दुओ के   खिलाफ है न की कुछ समुदाय विशेष के खिलाफ और तो और हमारे देश के एक होनहार मुख्यमंत्री ने तो इसे टैक्स फ्री कर दिया ताकि वो खुद को फिल्म  के साथ अरब नस्ल का होने का प्रमाण दे सके l


अभी भी समय है नहीं तो वो दिन दूर नहीं है जब हम भी पुराने पारसी धर्म की तरह विलुप्त प्राय हो जायेंगे अगर सही समय पर हम नहीं चेते तो क्यूंकि वो भी अपने ज़माने में बहुत ही उदार हुआ करते थे और आज  उनकी गिनती उंगलियो पर हो सकती हैं वो भी किसी दुसरे देश में तो समय रहते जाग जाओ हिन्दुओ नहीं तो आने वाला समय बहुत दुश्वार हो सकता है 

Wednesday, January 8, 2014

पहले भारत या पहले आप?

दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार के कई फैसले महत्वपूर्ण सवाल खड़े करते हैं

किसी कॉलम में ऐसे विचार लिखना आसान नहीं हैं जो लहर के खिलाफ हों खासतौर से उन अच्छे इरादे वाले लोगों के खिलाफ जिन्हें हमने खुद प्रोत्साहित किया है। मुझे ऐसी ही दुविधा का सामना करना पड़ा जब मैंने आप और उनके संभल कर चलने की जरूरत के बारे में लिखा। आम आदमी पार्टी इन दिनों सबकी पसंद है। मीडिया उसकी तारीफ करते नहीं थक रहा है। गरीब उसे अपना मसीहा मानते हैं। बोर हो चुके अमीर एक्जीक्यूटिव अपनी नौकरी छोड़कर आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। बड़ी संख्या में युवा आप को बढ़ाने के लिए आगे आ रहे हैं। केजरीवाल के प्रधानमंत्री बनने और लोकसभा चुनाव जीतने की चर्चा है।

आप इस तरह की प्रशंसा और समर्थन की हकदार है। वह ईमानदार, विनम्र और उत्साह से भरी है। पार्टी तेजी से जनमत को स्वीकार करती है, भले ही इसके लिए उसे अपने पुराने रुख में बदलाव करना पड़े। अनुकूल प्रतिक्रिया के मामले में वह मौजूदा राजनीतिक पार्टियों, जिनकी अगुआई ऐसे डायनासोर कर रहे हैं जो अपनी पूंछ में आग लगने के बावजूद टस से मस नहीं होते हैं,के बीच अलग खड़ी नजर आती है।

अगर आप अपने दांव सही तरीके से चलती है तो वह अगले दशक में प्रमुख राष्ट्रीय पार्टी बन जाएगी। हालांकि आप को महसूस करना होगा कि मुख्य चिंता आप नहीं है बल्कि देश है। दुख की बात है कि आप की ताजा नीतियां और फैसले राष्ट्रीय हित के संदर्भ में कई बड़े सवाल खड़े करते हैं।

वोटरों की नजर में हीरो बनने के लिए आप ने दिल्ली में मुफ्त पानी सप्लाई और बिजली की दरों में सब्सिडी आधारित विचित्र कटौती की घोषणा की है। आंकड़े धुंधली तस्वीर पेश करते हैं लेकिन कुछ अनुमानों के अनुसार इससे दिल्ली सरकार को एक वर्ष में हजारों करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ेगा। इस धन का उपयोग अस्पताल, स्कूल, फ्लाईओवर बनाने, रोजगार पैदा करने और कई अन्य उद्देश्यों के लिए हो सकता था। आप ने बिजली सेक्टर में कथित भ्रष्टाचार को कम करने और उससे हुए फायदे को बिजली टैरिफ में कमी के बतौर जनता तक पहुंचाने का वादा चुनाव में किया था। लेकिन सब्सिडी के आधार पर टैरिफ में रियायत का निर्णय गैर जिम्मेदाराना है। यदि आप के बिजली टैरिफ फैसले को भारत भर में लागू कर दिया जाए तो लाखों करोड़ रुपयों का खर्च आएगा। ऐसे उपायों से देश की वित्तीय स्थिति चरमरा जाएगी और उत्पादक व उपयोगी निवेश के लिए बहुत कम धनराशि बचेगी। निजी क्षेत्र की कंपनियों को भी गलत संकेत गया है और वे बिजली सेक्टर में धन लगाना बंद कर देंगी। ऐसा करके आप ने वाहवाही लूटी है पर क्या इससे भारत का भला होगा?

आप द्वारा दिल्ली के कॉलेजों में दिल्ली वासियों के लिए 90 प्रतिशत आरक्षण की पहल पर भी गौर कीजिए। इनमें से कई कॉलेज नेशनल ब्रांड बन चुके हैं। इससे आप को दिल्ली में कुछ वोट मिल सकते हैं। हालांकि, कई स्तरों पर होने वाले नुकसान पर ध्यान दीजिए। इससे देश भर के छात्र सर्वश्रेष्ठ कॉलेजों में दाखिला लेने से वंचित हो जाएंगे। कॉलेजों को प्रतिभाशाली छात्रों से वंचित होना पड़ेगा। उनके ब्रांड को आघात पहुंचेगा। यह निर्णय भारत को विभाजित करेगा। लोगों पर दिल्ली में बसने के लिए दबाव बढ़ेगा। शहरी ढांचे पर बोझ पड़ेगा। इसके कारण अभिभावक अपने बच्चों को विदेश भेजने के लिए प्रोत्साहित होंगे। विदेशी मुद्रा का नुकसान होगा। क्या हमें इस सब पर बहस नहीं करनी चाहिए? दिल्ली के श्रेष्ठ कॉलेज पूरे देश में शाखाएं क्यों नहीं खोलते हैं।

एक बार फिर वही बात आती है। इस कदम से आप को फायदा हो सकता है लेकिन क्या इससे भारत को फायदा हुआ है। आप ईमानदार हो सकती है लेकिन यदि आप राष्ट्र के खजाने को नुकसान पहुंचाती है और अपनी पार्टी के लाभ के लिए नेशनल ब्रांड्स को नष्ट कर सकती है तो क्या आप पूरी तरह पवित्र है? या कि आप अब पवित्र नहीं रही?

आप में आम आदमी की जीवनशैली के प्रति दंभ और संपन्नता के लिए हिकारत का नजरिया भी दिखता है। अनाप-शनाप उपभोग गलत है। पर अच्छे रहनसहन के लिए प्रयास करना और कड़ी मेहनत,ईमानदारी से कमाए धन को खर्च करना कैसे नैतिक दृष्टि से उचित नहीं है? पिछले दशक में लाखों भारतीयों ने कठिन परिश्रम करके अपनी जीवनशैली को बेहतर बनाया है। इससे हमारा प्रति व्यक्ति जीडीपी बढ़ा है। क्या हमें इसे हतोत्साहित करना चाहिए? क्या हम ईमानदार लेकिन गरीब भारत चाहते हैं? क्या आप गरीब समर्थक है या गरीबी समर्थक है?

ऐेसा क्यों हो रहा है? आप अभी से गलती क्यों कर रही है? पहला कारण-लोकसभा चुनाव लडऩे की जल्दबाजी हो सकता है। दूसरा कार- भारत की जरूरत के अनुरूप दृष्टि का अभाव है। आप भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की उपज है। अब वे राष्ट्रीय पार्टी बनना चाहते हैं। आप जो बनना चाहती है, उसके लिए नए सिरे से सोच विचार की जरूरत है। उसे शासन चलाना सीखना होगा। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि वह कैसे भ्रष्टाचार मुक्त भारत और युवाओं के लिए लाखों रोजगार देने वाली मजबूत अर्थव्यवस्था को साकार कर सकती है। इसमें समय लगेगा। हालांकि, आसन्न चुनाव और उसे मिला समर्थन इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं। इस जल्दबाजी में आप ऐसे गलत लोगों को आकर्षित करने का जोखिम उठा रही है जो बेहतर भारत पर सत्ता को तरजीह देते हैं। अगर आप लोकसभा चुनाव की दौड़ से हट जाती है तो केवल समर्पित लोग पार्टी में शामिल होंगे।

आप के 2014 का लोकसभा चुनाव लडऩे से त्रिशंकु संसद और खिचड़ी सरकार बनने के आसार बढ़ जाएंगे। इसका जो भी अर्थ हो पर कई विदेशी सरकारें, निवेशक और स्थानीय उद्योगपति महसूस करते हैं कि नरेंद्र मोदी भारत को तरक्की के रास्ते पर वापस ला सकते हैं। मैं नहीं जानता कि वे वर्तमान आप के बारे में ऐसा ही सोचते हैं। ऐसी स्थिति में भारत के लिए क्या अच्छा है? अपनी सभी बुराइयों के साथ कांग्रेस को भारत पर शासन करने का सबसे अधिक अनुभव है जबकि आप को नहीं है। क्या उक्त अनुभव बेमतलब है? 2014 में जब हम भारत के बारे में सोचें तब क्या हमें इन फैक्टर पर विचार नहीं करना चाहिए। विजय के जोश में लोग बहक जाते हैं और बड़ी लड़ाई की तैयारियों की अनदेखी करते हैं। आप को इसके बारे में विचार करना चाहिए। नागरिकों को भी किसी राजनीतिक पार्टी की प्रगति के बजाय देश हित को वरीयता देनी चाहिए। देश की कमान ऐसे लोगों के हाथों में सौंपनी चाहिए जो न सिर्फ ईमानदार हों बल्कि देश को आगे ले जा सकें।

पहले भारत या पहले आप?


लेखक- चेतन भगत 
साभार- दैनिक भास्कर

Wednesday, August 21, 2013

अमेरिकन डॉलर और भारतीय रूपये की असली कहानी

कृपया देश के लिए 7 दिन के लिए आप अपने कार को तभी उपयोग में लाये जब कोई विपति आप पड़े और और सच मानिये डॉलर अपने जगह पर आ जायेगा । जी हा ये सच है डॉलर की कीमत बस पेट्रोल से ही बढ़ता है, इसी को हम व्युत्पन्न व्यापार कहते है मतलब की हम दूसरी कोई वस्तु देके हम कोई और वस्तु ले । अमेरिका ये जानता है की पेट्रोल उतना ही कीमती है जितना की सोना इसी लिए उसने मध्य पूर्व के सभी तेल उत्पादक देशो से करार कर लिए की वो पेट्रोल केवल डॉलर में ही बेचेंगे और जो भी देश इस करार के खिलाफ जाता है उसके साथ क्या होता है कहने की बात नहीं है, चाहे इराक हो, ईरान हो, क्यूबा हो इन सब तेल देश उत्पादक देशो से अमेरिका की हमेशा इसी लिए ठनी रहती है और सद्दाम हुसैन को झूठा आरोप लगा के मारने के पीछे असली वजह ये करार ही था । और यही कारन है की अमेरिका अपने डॉलर पर ये छापता है की डॉलर उधार व्यापर के लिए वैध है(THIS NOTE IS LEGAL TENDER FOR ALL DEBTS, PUBLIC AND PRIVATE), इसका मतलब ये हुआ की अगर आप डॉलर को पसंद नहीं करते हो और उसके बदले सोना की मांग करोगे तो आपको वो सोना नहीं देंगे इसके उलट आप भारतीय रुपया के बदले सोना ले सकते हो(I PROMISE TO PAY THE BEARER THE SUM OF ONE HUNDRED RUPEES), आप देख सकते है की भारतीय नोट पर सीधा लिखा होता है की " I PROMISE TO PAY THE BEARER THE SUM OF ONE HUNDRED RUPEES"  और उसके साथ हमारे रिज़र्व बैंक के गवर्नर का हस्ताक्षर भी होता है जिसका मतलब है की आप को भारतीय मुद्रा नहीं पसंद तो फिर आप रिज़र्व बैंक से उतने का सोना ले सकते है और रिज़र्व बैंक को ये देना होगा ( असल में लेन-देन में कुछ मामूली अंतर आ सकता है ये उदाहरण आपको अच्छे से समझाने के लिए है)|
अब आप एक उदहारण ले, भारतीय पेट्रोलियम मंत्री पेट्रोल खरीदने मध्य पूर्व के देशो में जाते है और उस देश के पेट्रोल मंत्रालय कहता है की एक लिटर पेट्रोल एक डॉलर में आएगा, अब हमारे मंत्री साहब के पास रुपया है  और हमें भुगतान करना है डॉलर में, तो अब वो क्या करेंगे वो सीधा अमेरिका से बोलेंगे की हमें डॉलर दीजिये और अमेरिकन फ़ेडरल रिज़र्व श्वेत पत्र पर डॉलर को प्रिंट करेगा और हमारे मंत्री महोदय को दे देगा और हमें मिल गया डॉलर और हम इसे उस देश को दे देते है और पेट्रोल खरीदते है
लेकिन यहाँ एक धोखा हुआ वो कैसे देखिये अगर आप का दिमाग बदल गया और आप उसे अमेरिका को लौटाने जायेंगे की हमें अब जरुरत नहीं है डॉलर के बदले सोना आपको देने की तो उनका सीधा जवाब होता है की "हमने आपको कुछ लौटाने को बोला था क्या?" क्या आपने डॉलर को जांचा नहीं ? हमने सीधा सीधा लिखा है की डॉलर एक कर्ज है, उधार है, और इसी लिए अमेरिका को सोना नहीं चाहिए अपना डॉलर प्रिंट करने के लिए वो श्वेत पत्र लेंगे और उस पर डॉलर छापेंगे जैसा वो करते आये है
लेकिन मध्य पूर्व देशो को अमेरिका केवल डॉलर के बदले पेट्रोल बेचने के बदले में क्या देता है?
मध्य पूर्व देश के कई शाह अमेरिका को किराया देते है ताकि अमेरिका उनके और उनके उतराधिकारियो की  सुरक्षा कर सके, वैसे ही वो अभी भी अमेरिका का कर्ज चूका रहे है जो अमेरिका ने उनके यहाँ रोड, भवन और देश निर्माण में निवेश किया है। यही है डॉलर इसी लिए कुछ लोग कहते है की एक न एक दिन डॉलर भी धराशायी जरुर होगा। वर्तमान में भारत के साथ समस्या उन अमेरिकन डॉलर्स को खरीदना है, तो एक प्रकार से अमेरिका का श्वेत पत्र भारत के सोने के बराबर है अगर हम पेट्रोल और कार का उपभोग सिमित कर दे डॉलर अपने आप नीचे आ जायेगा|
सभी लोग रुपये और डॉलर की सच्चाई सबको  इसे शेयर जरुर करे
यहाँ पर पेट्रोल के अलावा हम अपने  रूपया के लिए और भी एक छोटी सी मदद कर सकते है  |
कृपया यहा कुछ देर समय दे अपने देश की खातिर
यहाँ एक छोटा सा उदहारण है
अगस्त 2008 में 1 US $=39.40
अगस्त 2013 में 1 $=64.45
क्या आप सोचते है की अमेरिकी अर्थव्यवस्था का विकास हुआ है नही लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था का पतन जरुर हुआ है , हमारी अर्थव्यवस्था हमारे अपने हाथों में  है, और  हमारी अर्थव्यवस्था अभी नाजुक दौर में है, अपना देश भी एशिया के और देशों के जैसे आर्थिक संकट से जूझ रही है, कई भारतीय उधोग बंद हो गए। हम एक गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे है और यदि हमने सही कदम नहीं उठाया तो बहुत जल्द हम एक गहरे संकट में होंगे । एक अनुमान के मुताबिक करीब 30,000करोड़ विदेशी मुद्रा हम  कास्मेटिक, स्नैक्स, चाय, और ठंढे पेय पदार्थो पर उड़ा देते है जो की यहाँ पर बनती है और यही उनका हम उपभोग भी करते है लेकिन उनका सारा फायदा अवैध रूप से  बाहर चला जाता है, क्या आपको पता है की एक ठंढा पेय की बोतल मात्र 70/80 पैसो में बनकर तैयार होती है लेकिन उसे 20/25 रूपये में बेचीं जाती है और मुनाफे के रूप में एक मोटी रकम हम अपने देश से बाहर भेजते है, यह  हमारे अर्थव्यवस्था में एक बड़े छेद की तरह है हैं, हम बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के खिलाफ नही है लेकिन हमे अपना सही और ग़लत देखना चाहिए हम सभी से आग्रह करते है कि कम से कम दो साल तक बस भारतीय और घरेलू निर्मित सामान ही उपयोग में लायेंगे, नही तो जैसे जैसे पेट्रोल महंगा होगा और हम ऐसे ही विदेशी वस्तुओं का उपभोग जारी रखा तो आने वाले समय में  रूपये की कीमत में और गिरावट होगी और अंत में हमें किसी भी वस्तु को खरीदने के लिए और भी ज्यादा खर्च करना पड़ेगा ।
आप इसके लिए क्या कर सकते है?
केवल वही वस्तु ख़रीदे जो पूर्णत: भारतीय हो, हम में से हर एक को इस जागरूकता का नेता होना चाहिए। यह एक मात्र रास्ता है अपने देश को आर्थिक संकट से बचाने का, आपको अपने जीवनशैली को बदलने की जरुरत नहीं है बस अपने उपयोग की वस्तुओ को बदल दे | रोजमर्रा की चीजे जैसे ठंढे पेय, नहाने का साबुन, टूथपेस्ट, ब्रश, शेविंग क्रीम, ब्लेड, पाउडर, दूध का पावडर, शैम्पू, और खाद्य सामग्री इत्यादि, आपको भारतीय उत्पाद खरीदना चाहिए और ये निश्चित करना चाहिए कि भारतीय मुद्रा देश के बाहर नही जायेगी| एक एक भारतीय उत्पाद आप जो खरीदते है उससे एक बड़ा परिवर्तन होगा, ये भारत को बचाएगा, ये भारतीय उधोग को बचाएगा तो चलिए आइये आज से ही हम एक परिवर्तन की शुरुवात करते है| मैं या आप बहुराष्ट्रीय कम्पनियो के खिलाफ नहीं है हम तो बस अपना और अपने देश का हित सोच रहे है, हर एक दिन हम एक संघर्ष करेंगे एक सच्चे आजादी के लिए, उस आजादी के लिए जिसके लिए हमने बहुत सी कुर्बानिया दी है, हमारे वीर जवान बहुत बड़ी शहादत दी ताकि हम शांति और अमन से रह सके लेकिन ये वक्त हमारे लिए डरावना है, एक सम्प्रभु राष्ट्र के लिए खतरा है, बहुराष्ट्रीय कम्पनियो के लिए ये वैश्वीकरण है लेकिन हमारे और आपके लिए ये एक उपनिवेश है आर्थिक उपनिवेश।  उपनिवेशी भारत को छोड़ चुके है लेकिन इस बार वो पुरी तैयारी के साथ पुरानी गलातियों को सुधार के आयें है और  हमें पहले से ज्यादा मजबूर कर देंगे। रुस, दक्षिण कोरिआ, मेक्सिको और भी बहुत लंबी सूची है, हमे जरुरत है उनके अनुभव और अपने इतिहास को ध्यान में रखते कुछ सीख लेने की, आइये एक सच्चे भारतीय होने का फर्ज अदा करे | यह स्पष्ट है की उपर दी हुयी वस्तुओ की सुची को हम अपनी जिंदगी से हटा नहीं सकते लेकिन बदल जरुर सकते है ।

Sunday, May 5, 2013

चीनी दुसाहस, हमारे कायर नेता और भांड मिडिया



चीन में अप्रैल 2013 के शुरुआत में ही नेतृत्व में बदलाव हुआ और उसी माह में चीन ने एक बड़ा घुसपैठ अपने पडोसी भारत के सरजमी पर किया | भारत जो की एक उभरता हुआ विश्व शक्ति है और बहुत साल पहले से ही ये मांग की जा रही थी की भारत को अब विश्व स्तर पर एक अहम भूमिका निभाना चाहिए । एक देश जिसे संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद् में  स्थायी सीट मिलते मिलते रह गया वो भी चीन की वजह से वो चीन ही था जिसने भारत का विरोध किया था ये कहते हुए की खुद भारत में ही एक बिना रीढ़ की सरकार है और उसे विश्व स्तर पर इतनी बड़ी भूमिका नहीं दी जा सकती | 

कुछ साल पहले मैंने कही पढ़ा था की चीन भारत को सबक सिखाना चाहता है और और वो एक बड़ा सैनिक अभियान करके भारत के बड़े भू भाग पर कब्ज़ा कर सकता है और फिर समझौते के मेज पर वो कुछ शर्मनाक शर्ते थोप सकता है और भारत में ये मांग उठी की एक सेना की डिविजन बने जाये जो उत्तर पूर्व में ही रहे लेकिन सरकार ने बजट का रोना लेके इस मसले को ठंढे बस्ते में डाल दिया। 

आखिर वही हुआ जिसका डर था चीन ने बिना एक गोली चलाये ही कुछ मीटर नहीं बल्कि 20 किलोमीटर भारत के अंदरूनी हिस्से में आ गया और खुल्लम खुल्ला भारत को चुनौती दे दी की जो करना है करो लो, भारत 1998 में ही परमाणु संपन्न हो गया था अग्नि, पृथ्वी और भी कई तरह के मिसाइल है और लाखो सैनिक जो की बस एक इशारे पर ही अपने देश के लिए अपनी जान देने को तैयार है, लेकिन हमारे पास एक सक्षम नेतृत्व, राजनितिक ताकत और देशभक्ति की भावना की कमी है 

चीन ने हमारी औकात हमें दिखा दी है की अभी हम किस स्तर पर है, हमारे नेता जो की अव्वल दर्जे के कायर है अब कहते फिर रहे है की अगर चीन ने ये सब नहीं किया होता तो हम चीन के दौरे पर जाते अरे तुम अगर चीन जाते भी तो कौन तुम्हारी परवाह करता क्या किसी को लगता है की भारत के जो भी राजनयिक चीन के दौरे पर जायेंगे तो चीन इन्हें थोडा सा भी भाव देता होगा कुत्ते की तरह इनसे व्यवहार किया जाता होगा 

चीन बस ये पुरे दुनिया को दिखाना चाहता है की भारत जो की अपने ही सरजमीं की ही सुरक्षा नहीं कर पाया वो क्या खाक विश्व स्तर पर एक बड़ी भूमिका निभाएगा, चीन ने ये  साबित कर दिया की भारत में अभी नपुंसक सरकार है और चीन अच्छी तरह से जानता है की भारत के भ्रष्ट नेता देश को लूटने और अपना माल बनाने में व्यस्त है उन्हें जरा सा भी इस बात की फ़िक्र नहीं है की भारत के सरजमीं पर चीन ने घुसपैठ किया है और भारतीय मिडिया नए रिलीज हुए फिल्मो और उनकी मसालेदार खबरों , आईपीएल और फैशन शो में ही व्यस्त है क्या भारतीय मिडिया ने कभी ईमानदारी के साथ चीन के घुसपैठ को दिखाया  है । 


अभी असली कहानी तो बाकि है चीन अभी हमारी ताकत और जूझने की क्षमता देख रहा है की हम कितना तैयार है उसकी इस घुसपैठ को लेते है, हमारे नेता क्या प्रतिक्रिया देते है, चीन की तो असली मंशा पुरे जम्मू कश्मीर को पाकिस्तान को तोहफे में देने की है जैसा पाकिस्तान ने चीन को गुलाम कश्मीर का एक हिस्सा तोहफे में दिया था समय हमारे हाथ से निकलता जा रहा है "अभी नहीं तो कभी नहीं" वाली स्थिति है युद्ध का पक्ष कोई नहीं लेता लेकिन जब देश संप्रभुता पर आंच आये तो हमें कायरता से बाहर आके इसका मुहतोड़ जवाब देना चाहिए और पूरी दुनिया को दिखा देना चाहिए की जब बात हमारी आजादी की हो तो हम भी किसी से कम नहीं 

सबसे बड़ी शर्म तो देश के नेताओ और मिडिया को करना चाहिए, मिडिया जो कि 24 घंटे  ड्रामा और बकवास करते रहती है अपना एक ओब वैन उस हॉस्पिटल के सामने खड़ा किया था जब ऐश्वर्य रॉय उस हॉस्पिटल में थी लेकिन एक भी रिपोर्टर लद्दाख में नहीं भेजा देश लुट रहा है और ये नेता और मीडिया एक जोंक की तरह देश का खून चूसने में लगे है, ये नीच देश को एक धरती को टुकड़ा मानते है वो दिन दूर नहीं जब उनके पाँव के निचे वो जमीं नहीं रहेगी तब ये इनको अहसास होगा की नहीं हमने गलती किया है और अफ़सोस जताने  के लिए इनके पास समय नहीं होगा । 
देश को आज स्वच्छ और निर्भय हृदय की जरुरत है आज हमें गुरु गोबिंद सिंह जी  जैसा योद्धा चाहिए जिन्होंने अपनी और अपने परिवार की परवाह किये बिना शक्तिशाली मुगलों से टक्कर लिया और उन्होंने अपना सब कुछ लुटा कर भी अपने धर्म और देश की रक्षा की । 
दोस्तों ये कठिन घडी है या तो कुछ करो नहीं तो शर्मनाक जिन्दगी जिओ !!! (अनुवादित )