Tuesday, January 20, 2015
Tuesday, January 13, 2015
भारत का उन्नत समाज और विश्व भाग -II
आज भले ही विज्ञान कितना भी
तरक्की कर ले लेकिन आज के आधुनिक विज्ञान भी वैदिक विज्ञान के आगे बौना ही नजर आता
है लेकिन मानने वाले आज भी मानते है की वेदों में वर्णित विज्ञान केवल काल्पनिक है,
आज से कुछ शताब्दी पहले पृथ्वी के चक्कर
लगाने वाले मार्ग को सही बताने वाले पश्चिमी विचारको को पश्चिमी समाज जला कर मार
डालता था लेकिन वैदिक काल से ही हम सूर्य भगवान के उतारायण और दक्षिणायन गमन को
बताने वाला वैदिक विज्ञान आज के लिए मिथक है बस जब की हम सदियों से सूर्य के मकर
रेखा में आने का पर्व मकर सक्रांति मानते आये है और आधुनिक विज्ञान भी आज ये मानता
है लेकिन कुछ जाहिल लोग अभी भी वैदिक विज्ञान पर ऊँगली उठाते हुए नजर आते है जो की
पश्चिम के रटे रटाये विज्ञान को पढ़ के खुद को एक वैज्ञानिक से खुद को कम नहीं
मानते l
आज से 100 साल पहले भी अगर
को बोलता की अमेरिका में होने वाले कुछ घटना को हम भारत में बैठ के देख सकते है तो
लोग पागल घोषित कर देते और आज वो सच्चाई है जो विज्ञान दुनिया में आज लोकप्रिय है जिससे
हम कही भी होने वाले खेल को अपने घर बैठे आँखों से देखते है लेकिन महाभारत के
युद्ध में संजय के द्वारा आँखों देखा हाल महाराज धृतराष्ट्र को सुनाना उनको मिथक
लगता है क्या ये वैदिक समय के उन्नत विज्ञान का चमत्कार नहीं है जो की हमारे धार्मिक
ग्रंथो में भी वर्णित हैl उस समय के अमोघ अस्त्र और ब्रम्हास्त्र जिस से की पुरे
श्रृष्टि की विनाश होने की बात कही गयी है वो ही आज का परमाणु और अणु बम है लेकिन
फिर भी दिमाग से खाली लोग अभी भी उन पर सवालिया निशान ही लगाते है की वो सब काल्पनिक
बाते है, कल्पना भी कभी भी असामान्य नहीं होती कल्पना वही करता है जो सामने देखता
है लेकिन पश्चिम और लाल बंदरो के पढाये गए शैक्षिक दस्तावेजो से हम इतने मुर्ख हो
गए है की हमें सही और गलत में अंतर पता नहीं चलता l
विमानों का वर्णन वैदिक काल
से ही उल्लेखित है और अमेरिका भी मानता है की वैदिक काल के विमान कला आज के विमान
विज्ञान से काफी आगे है जो मन के गति से उड़ान भरते थे लेकिन आज विमान को उड़ते देख
के भी लोग ये नहीं समझ पते की क्यों नहीं वैदिक कल के भी लोग विज्ञान कला से भली
भांति परिचित थे l विमान कला ही क्यों अन्तरिक्ष विज्ञान से लेके गणित के कठिन से
कठिन प्रमेय भी वेदों में उल्लेखित है और तो और न्यूटन के गुरुत्वकर्षण नियम से
बहुत पहले ही भारत के ऋषि महर्षियो ने इस विज्ञान को भली भाति समझते थे और तो और
विश्व में पहली सर्जरी से लेकर विकसित चिकित्सा प्रणाली भारत में प्रचलित थी लेकिन
आज कल इसी बात पर बहस हो रही है की वो विज्ञान था या बस मिथक ? जो अभी भी इस बात
पर संदेह कर रहा हो उसे अपने मानसिक इलाज के लिए तैयार रहना चाहिए क्यूंकि वो सभी
तथ्य जो की वेदों में वर्णित है वो आज के आधुनिक विज्ञान से कही आगे है चाहे हो
सूर्य से पृथ्वी की दुरी हो या फिर प्रकाश की गति सब वेदों में वर्णित है और आज भी
वो सत्य है उन्हें आधुनिक विज्ञान झुठला नहीं सकता और नहीं वेदों में कही बाइबिल और कुरान की तरह पृथ्वी
को चपटा या सपाट नहीं बताया गया है बल्कि हम कह सकते है की आधुनिक विज्ञान भी
वेदों की कही बातो को ही सही साबित करते है l लेकिन फिर भी अंग्रेजो के गुलाम उनके
नाजायज औलाद भी भी हल्ला करते है की वो वैदिक विज्ञान तथ्यपूर्ण नहीं थे तो फिर
अफ़सोस ही होता है इन पढ़े लिखे मूर्खो पर l
सूर्य नारायण के मकर रेखा
में प्रवेश करने का पर्व मकर सक्रांति की सबको हार्दिक शुभकामनाये !
Tuesday, January 6, 2015
भारत का उन्नत समाज और विश्व भाग -1
भारतवर्ष को जी भर के लुटने
के बाद बाहर के लुटेरो का मन नहीं भरा तो उन्होंने भारत के इतिहास के साथ जबरदस्त
छेड़छाड़ किया, ताकि वो भारतवर्ष पर जी भर के शासन कर सके l मुस्लिम शासको ने जहा
भारत में धन और पद का लालच के साथ जान से मारने की धमकी के साथ हमारे उपर शासन
किया लेकिन उन्होंने भारत के शूरवीरो का मनोबल तोड़ने में विफल रहे क्यूंकि पुरे
भारत में उनका शासन स्थापित नहीं हो पाया था उस समय इस्लाम की आंधी पुरे एशिया को
अपने कब्जे में ले चुकी थी बस उत्तर-पूर्व में बसे जापान और चीन ही इस आंधी से बचे
थे बाकि भारत के पूर्व में बसे इंडोनेशिया और मलेशिया जो की भारत की तरह हिन्दू-बौद्ध
धर्म के अनुयायी थे वो पुरे तरह इस्लाम अपना चुके थे लेकिन बस पूण्य भूमि भारत अभी
भी इस्लाम को स्वीकार करना दूर उसे अभी भी संघर्ष कर रहा था लगभग 1000 सालो के
शासन के बावजूद भारत कभी भी इस्लाम को अंगीकार नहीं कर सका था बस कुछ बुजदिल लोग
जो धन और जान के डर से पश्चिम की ओर मुह करके अपने पिछवाड़े को पूर्व की ओर करना
सिख गए थे लेकिन फिर भी भारत की मुख्यधारा हिंदुत्व का कोई जवाब नहीं खोज सके l
औरंगजेब के पतन के साथ ही
भारतवर्ष पर अंग्रेजो ने अपनी पकड़ मजबूत करनी शुरू कर दी थी क्यूंकि औरंगजेब अपने पूर्वजो की सलाह के बावजूद वो गलती कर बैठा
जो मुग़ल सल्तनत के बाकि बादशाहों ने कभी नहीं किया, औरंगजेब जो की जिन्दा पीर के
नाम से मशहूर था उसने समाज में हिन्दू बहुल समाज से दुश्मनी मोल ले लिया और
हिन्दुओ का जी भर के दमन किया और उसका फल उसे बहुत जल्दी मिला जब हिन्दू सम्राट
शिवाजी महाराज और पश्चिम भारत में सिख साम्राज्य ने उसे कभी भी चैन की सांस नहीं
लेने दिया और उसे मरते समय भी कभी चैन नहीं आया और दक्षिण भारत के एक अभियान में
उसने अपने अंतिम सांस लिया यह कहना गलत नहीं
होगा की औरंगजेब ने ही भारत में मुग़ल साम्राज्य के लिए ताबूत तैयार किया था
जो उसने हिन्दुओ से दुश्मनी मोल ली थी उसके बाकि के पूर्वजो ने हिन्दुओ के दुशमनी
के साथ दोस्ती और रिश्ते भी स्थापित करी थी लेकिन जिन्दा पीर बनने की चाहत ने
औरंगजेब की हालत ऐसी कर दी की बाद के मुग़ल शासक बस इतना कमजोर बन गए की वो अपनी
इज्जत भी न बचा सके उनके सेनानायक समेत उनके वजीरो ने उनकी हालत इतनी कमजोर कर दी
की वो आखिर में आधुनिक भारत में अभी भी मुगलों के वंशज चाय बेचते है या फिर भुखमरी
के कगार पर है ...... बाकि का लेख अगले
अंक में
Monday, January 5, 2015
देश की गद्दार मीडिया और सेखुलर समाज
जब 2008 में UPA सरकार थी
तब नाव से ही आये कुछ तस्करों ने मुंबई में भारी तबाही मचाई थी और उस समय खान्ग्रेस
एंड पूरा गैंग इस हमलो को रोकने में नाकाम हो गया था लेकिन अभी भाजपा सरकार ने जिस
तरह पूरी तरह से इस तरह के हमले जो की “प्रवासी भारतीय” दिन के होने वाली थी उसे
रोका है उससे खतरनाक मंसूबे बनाने वाले तो खिन्न हुए ही होंगे लेकिन खान्ग्रेस एंड
गैंग जिस तरह से उस बोट वालो के लिए वकालत कर रही है उसे देख ये यही लगता है की या
तो ये गैंग वैसा ही खतरनाक मंसूबे में शामिल थी या फिर उसे बड़ा ही दुःख हुआ की
क्यों हमला नहीं हुआ इस देश में ध्यान रहे की वह 12 जनवरी के एक कार्यक्रम में
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी भी जाने वाले थे l
अगर उनपर हमला होता तो देश में
क्या होता सभी जानते है और अगर प्रवासी भारतीय मेला में अगर हमला होता तो उस में भी
काफी बड़ा नरसंहार होता और वो भी प्रवासियों का पुरे भारत का विश्व के सामने ख़राब
तस्वीर बन जाती और प्रधानमंत्री जो की इतने मेहनत से लगे है भारत में निवेश का
माहौल बनाने में वो सारा माहौल ख़राब हो जाताl आखिर कौन है इन हमलो के
पीछे ??? या तो भारत में निवेश रोकने वाले या फिर प्रधानमंत्री की हत्या कर के देश में
अराजकता फ़ैलाने वाले ??? और अगर दोनों में से कोई हो लेकिन दोनों के इरादे भारत के लिए
सही नहीं है और सबसे बड़ी बात इनकी तरफदारी करने वाली खान्ग्रेस और मिडिया क्यों
उनका बचाव कर रही है ?? दो मिडिया समूह ने तो इसके लिए खास कार्यक्रम चलाया NDTV
ने इस पर बहस चलायी की वो स्मगलर थे और The Indian Express ने एक आर्टिकल अपने सम्पादकीय
पृष्ठ पर इसके लिए खास लेख लिखा की तटरक्षक बल ने पाकिस्तान के मछुवारो की नाव पर
हमला करके उसे जला दिया l
और इनके इसी करतूतों की वजह
है की इसमें पाकिस्तानी सेना के भागीदारी के बावजूद पाकिस्तान सीमा पर हम पर हमले
करता है क्यूंकि उसे पता है की भले ही खान्ग्रेस एंड गैंग सत्ता में नहीं हो
लेकिन पैसे का वो नमक अदा कर के रहेगीl शर्म आती है देश के इन गद्दारों पर
और सबसे ज्यादा आश्चर्य होता है इस देश की निक्कमी जनता की जो इतना सब कुछ खुल्ला
देख के भी इन देशद्रोहियों की असलियत नहीं समझ रही l क्या हम इतने मुर्ख है जो की
देश के दुश्मन आज देश में खुले आम इस तरह से सरेआम देश को बदनाम कर रही है और हम
भेड़ बकरी की तरह उनकी तरफ देख रहे है
Saturday, January 3, 2015
खुद का पतन करता हिन्दू समाज
भारतीय समाज हमेशा से अपने
ज्यादा उदार होने का खामियाजा उठाता आया है लेकिन इससे हमने कोई सिख नहीं लिया हैl
प्राचीन काल में जब राजतन्त्र का दौर था और उस समय में राजा जिस धर्म को मानता था
उसे जबरन प्रजा पर भी थोपा जाता था लेकिन हमारे भारतीय समाज में ऐसा कोई जबरदस्ती
नहीं थी लोग धर्मं और अपने और भी निर्णय के लिए स्वतंत्र थे, ये जोरदार तमाचा है
उन कथित पाखंडियो के मुह पर जो अभी सभ्यता और संस्कृति के लिए पश्चिम का अनुसरण
करते हैl हमारी मातृभूमि ने दुनिया को कई पंथ दिए बौद्ध धर्म जिसको मानने वाले जी
भर के हिंदुत्व को कोसते है लेकिन जिस समय बौद्ध धर्म का उदय हो रहा था तो उसे
संरक्षण देने वाले साम्राज्य हिन्दू साम्राज्य थे और खुद तब के हर्यंक वंश के
सम्राट बिम्बिसार ने इस धर्म के बहुत बड़े संरक्षक थे लेकिन कुछ मुर्ख लोग अभी भी
मुगलों और अंग्रेजो का इतिहास पढ़ कर हिन्दुत्व और हिन्दू समाज को गाली देने से
नहीं चुकते बस जरा सोचिये अगर महात्मा बुद्ध यूरोप या अरब में होते तो उनके साथ
क्या होता ?? लेकिन झूठा इतिहास पढ़ के गुमराह हुए एक बड़े जन समुदाय को आप कैसे
समझा सकते जब उनके दिमाग में जाति पाती का झूठा जहर भर दिया गया हो और बौद्ध पंथ
ही क्यों भारत की समृद्ध धरा तो जैन पंथ, सिख पंथ की भी जननी है l इन पन्थो के
अलावा भी भारत हमेशा से दुसरे पन्थो के लिए भी शरण स्थली साबित हुआ है l जब इस्लाम
अरब समाज में फ़ैल रहा था तो फारस का पुराना धर्म जरथ्रुस्त के अनुयायियों का
जबरदस्त नरसंहार हुआ और जो जान बचा के भागे उन्हें भारत की पुण्य भूमि ने ही शरण
दिया जिन्हें आज हम पारसी समुदाय बोलते है
और हालत आज ये है की पूरी दुनिया में आज पारसी
बस भारत में ही पाए जाते है l
हम सहिष्णुता के साथ बस एक
गलती कर जाते है की अपने साथ होने वाली गलतियो को नजरअंदाज कर देते है जो की अतीत
से हमें बार बार सोचने पर मजबूर करती है लेकिन फिर भी हम अपनी गलतियो से बाज नहीं
आते l अभी उदाहरण के लिए देखिये कैसे हिन्दू की भावनाओ का मजाक खुद उन्ही के देश में
खुद उनकी चुनी सरकार उड़ाती है, जनवरी 2013 में एक फिल्म आई थी “विश्वरूपम” जिसे हमारे
देश के बड़े कलाकार कमल हासन ने बनाया था उसमे तालिबान के असली कृत्यों को दर्शाया
गया था जिसके चलते हमारे देश के मुसलमानों की भावनाए आहत हो गयी थी और नौबत यहाँ
तक आ गई थी की कमल हासन साहब उस समय के खान्ग्रेस सरकार से इतने आहत हो गए थे की
उन्होंने देश छोड़ने की धमकी भी दे दी थी लेकिन फिर भी सरकार ने उनसे माफ़ी मंगवाई
और साथ में फिल्म के कुछ दृश्य भी हटाई गई फिर फिल्म रिलीज हुई और अभी कुछ दिन
पहले एक तमिल फिल्म “शिवम्” में कुछ दृश्यों के ऊपर सेंसर बोर्ड ने ये कहते हुए
कैंची चला दी की इससे समुदाय विशेष की भावनाए आहत हो रही है लेकिन उसी सेंसर बोर्ड
को PK में कुछ गड़बड़ नजर नहीं आई क्यूंकि वो हिन्दुओ के खिलाफ है न की कुछ समुदाय विशेष के खिलाफ और
तो और हमारे देश के एक होनहार मुख्यमंत्री ने तो इसे टैक्स फ्री कर दिया ताकि वो
खुद को फिल्म के साथ अरब नस्ल का होने का
प्रमाण दे सके l
अभी भी समय है नहीं तो वो
दिन दूर नहीं है जब हम भी पुराने पारसी धर्म की तरह विलुप्त प्राय हो जायेंगे अगर
सही समय पर हम नहीं चेते तो क्यूंकि वो भी अपने ज़माने में बहुत ही उदार हुआ करते थे
और आज उनकी गिनती उंगलियो पर हो सकती हैं
वो भी किसी दुसरे देश में तो समय रहते जाग जाओ हिन्दुओ नहीं तो आने वाला समय बहुत
दुश्वार हो सकता है
Wednesday, January 8, 2014
पहले भारत या पहले आप?
दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार के कई फैसले महत्वपूर्ण सवाल खड़े करते हैं
किसी कॉलम में ऐसे विचार लिखना आसान नहीं हैं जो लहर के खिलाफ हों खासतौर से उन अच्छे इरादे वाले लोगों के खिलाफ जिन्हें हमने खुद प्रोत्साहित किया है। मुझे ऐसी ही दुविधा का सामना करना पड़ा जब मैंने आप और उनके संभल कर चलने की जरूरत के बारे में लिखा। आम आदमी पार्टी इन दिनों सबकी पसंद है। मीडिया उसकी तारीफ करते नहीं थक रहा है। गरीब उसे अपना मसीहा मानते हैं। बोर हो चुके अमीर एक्जीक्यूटिव अपनी नौकरी छोड़कर आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। बड़ी संख्या में युवा आप को बढ़ाने के लिए आगे आ रहे हैं। केजरीवाल के प्रधानमंत्री बनने और लोकसभा चुनाव जीतने की चर्चा है।
आप इस तरह की प्रशंसा और समर्थन की हकदार है। वह ईमानदार, विनम्र और उत्साह से भरी है। पार्टी तेजी से जनमत को स्वीकार करती है, भले ही इसके लिए उसे अपने पुराने रुख में बदलाव करना पड़े। अनुकूल प्रतिक्रिया के मामले में वह मौजूदा राजनीतिक पार्टियों, जिनकी अगुआई ऐसे डायनासोर कर रहे हैं जो अपनी पूंछ में आग लगने के बावजूद टस से मस नहीं होते हैं,के बीच अलग खड़ी नजर आती है।
अगर आप अपने दांव सही तरीके से चलती है तो वह अगले दशक में प्रमुख राष्ट्रीय पार्टी बन जाएगी। हालांकि आप को महसूस करना होगा कि मुख्य चिंता आप नहीं है बल्कि देश है। दुख की बात है कि आप की ताजा नीतियां और फैसले राष्ट्रीय हित के संदर्भ में कई बड़े सवाल खड़े करते हैं।
वोटरों की नजर में हीरो बनने के लिए आप ने दिल्ली में मुफ्त पानी सप्लाई और बिजली की दरों में सब्सिडी आधारित विचित्र कटौती की घोषणा की है। आंकड़े धुंधली तस्वीर पेश करते हैं लेकिन कुछ अनुमानों के अनुसार इससे दिल्ली सरकार को एक वर्ष में हजारों करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ेगा। इस धन का उपयोग अस्पताल, स्कूल, फ्लाईओवर बनाने, रोजगार पैदा करने और कई अन्य उद्देश्यों के लिए हो सकता था। आप ने बिजली सेक्टर में कथित भ्रष्टाचार को कम करने और उससे हुए फायदे को बिजली टैरिफ में कमी के बतौर जनता तक पहुंचाने का वादा चुनाव में किया था। लेकिन सब्सिडी के आधार पर टैरिफ में रियायत का निर्णय गैर जिम्मेदाराना है। यदि आप के बिजली टैरिफ फैसले को भारत भर में लागू कर दिया जाए तो लाखों करोड़ रुपयों का खर्च आएगा। ऐसे उपायों से देश की वित्तीय स्थिति चरमरा जाएगी और उत्पादक व उपयोगी निवेश के लिए बहुत कम धनराशि बचेगी। निजी क्षेत्र की कंपनियों को भी गलत संकेत गया है और वे बिजली सेक्टर में धन लगाना बंद कर देंगी। ऐसा करके आप ने वाहवाही लूटी है पर क्या इससे भारत का भला होगा?
आप द्वारा दिल्ली के कॉलेजों में दिल्ली वासियों के लिए 90 प्रतिशत आरक्षण की पहल पर भी गौर कीजिए। इनमें से कई कॉलेज नेशनल ब्रांड बन चुके हैं। इससे आप को दिल्ली में कुछ वोट मिल सकते हैं। हालांकि, कई स्तरों पर होने वाले नुकसान पर ध्यान दीजिए। इससे देश भर के छात्र सर्वश्रेष्ठ कॉलेजों में दाखिला लेने से वंचित हो जाएंगे। कॉलेजों को प्रतिभाशाली छात्रों से वंचित होना पड़ेगा। उनके ब्रांड को आघात पहुंचेगा। यह निर्णय भारत को विभाजित करेगा। लोगों पर दिल्ली में बसने के लिए दबाव बढ़ेगा। शहरी ढांचे पर बोझ पड़ेगा। इसके कारण अभिभावक अपने बच्चों को विदेश भेजने के लिए प्रोत्साहित होंगे। विदेशी मुद्रा का नुकसान होगा। क्या हमें इस सब पर बहस नहीं करनी चाहिए? दिल्ली के श्रेष्ठ कॉलेज पूरे देश में शाखाएं क्यों नहीं खोलते हैं।
एक बार फिर वही बात आती है। इस कदम से आप को फायदा हो सकता है लेकिन क्या इससे भारत को फायदा हुआ है। आप ईमानदार हो सकती है लेकिन यदि आप राष्ट्र के खजाने को नुकसान पहुंचाती है और अपनी पार्टी के लाभ के लिए नेशनल ब्रांड्स को नष्ट कर सकती है तो क्या आप पूरी तरह पवित्र है? या कि आप अब पवित्र नहीं रही?
आप में आम आदमी की जीवनशैली के प्रति दंभ और संपन्नता के लिए हिकारत का नजरिया भी दिखता है। अनाप-शनाप उपभोग गलत है। पर अच्छे रहनसहन के लिए प्रयास करना और कड़ी मेहनत,ईमानदारी से कमाए धन को खर्च करना कैसे नैतिक दृष्टि से उचित नहीं है? पिछले दशक में लाखों भारतीयों ने कठिन परिश्रम करके अपनी जीवनशैली को बेहतर बनाया है। इससे हमारा प्रति व्यक्ति जीडीपी बढ़ा है। क्या हमें इसे हतोत्साहित करना चाहिए? क्या हम ईमानदार लेकिन गरीब भारत चाहते हैं? क्या आप गरीब समर्थक है या गरीबी समर्थक है?
ऐेसा क्यों हो रहा है? आप अभी से गलती क्यों कर रही है? पहला कारण-लोकसभा चुनाव लडऩे की जल्दबाजी हो सकता है। दूसरा कार- भारत की जरूरत के अनुरूप दृष्टि का अभाव है। आप भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की उपज है। अब वे राष्ट्रीय पार्टी बनना चाहते हैं। आप जो बनना चाहती है, उसके लिए नए सिरे से सोच विचार की जरूरत है। उसे शासन चलाना सीखना होगा। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि वह कैसे भ्रष्टाचार मुक्त भारत और युवाओं के लिए लाखों रोजगार देने वाली मजबूत अर्थव्यवस्था को साकार कर सकती है। इसमें समय लगेगा। हालांकि, आसन्न चुनाव और उसे मिला समर्थन इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं। इस जल्दबाजी में आप ऐसे गलत लोगों को आकर्षित करने का जोखिम उठा रही है जो बेहतर भारत पर सत्ता को तरजीह देते हैं। अगर आप लोकसभा चुनाव की दौड़ से हट जाती है तो केवल समर्पित लोग पार्टी में शामिल होंगे।
आप के 2014 का लोकसभा चुनाव लडऩे से त्रिशंकु संसद और खिचड़ी सरकार बनने के आसार बढ़ जाएंगे। इसका जो भी अर्थ हो पर कई विदेशी सरकारें, निवेशक और स्थानीय उद्योगपति महसूस करते हैं कि नरेंद्र मोदी भारत को तरक्की के रास्ते पर वापस ला सकते हैं। मैं नहीं जानता कि वे वर्तमान आप के बारे में ऐसा ही सोचते हैं। ऐसी स्थिति में भारत के लिए क्या अच्छा है? अपनी सभी बुराइयों के साथ कांग्रेस को भारत पर शासन करने का सबसे अधिक अनुभव है जबकि आप को नहीं है। क्या उक्त अनुभव बेमतलब है? 2014 में जब हम भारत के बारे में सोचें तब क्या हमें इन फैक्टर पर विचार नहीं करना चाहिए। विजय के जोश में लोग बहक जाते हैं और बड़ी लड़ाई की तैयारियों की अनदेखी करते हैं। आप को इसके बारे में विचार करना चाहिए। नागरिकों को भी किसी राजनीतिक पार्टी की प्रगति के बजाय देश हित को वरीयता देनी चाहिए। देश की कमान ऐसे लोगों के हाथों में सौंपनी चाहिए जो न सिर्फ ईमानदार हों बल्कि देश को आगे ले जा सकें।
पहले भारत या पहले आप?
लेखक- चेतन भगत
साभार- दैनिक भास्कर
किसी कॉलम में ऐसे विचार लिखना आसान नहीं हैं जो लहर के खिलाफ हों खासतौर से उन अच्छे इरादे वाले लोगों के खिलाफ जिन्हें हमने खुद प्रोत्साहित किया है। मुझे ऐसी ही दुविधा का सामना करना पड़ा जब मैंने आप और उनके संभल कर चलने की जरूरत के बारे में लिखा। आम आदमी पार्टी इन दिनों सबकी पसंद है। मीडिया उसकी तारीफ करते नहीं थक रहा है। गरीब उसे अपना मसीहा मानते हैं। बोर हो चुके अमीर एक्जीक्यूटिव अपनी नौकरी छोड़कर आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। बड़ी संख्या में युवा आप को बढ़ाने के लिए आगे आ रहे हैं। केजरीवाल के प्रधानमंत्री बनने और लोकसभा चुनाव जीतने की चर्चा है।
आप इस तरह की प्रशंसा और समर्थन की हकदार है। वह ईमानदार, विनम्र और उत्साह से भरी है। पार्टी तेजी से जनमत को स्वीकार करती है, भले ही इसके लिए उसे अपने पुराने रुख में बदलाव करना पड़े। अनुकूल प्रतिक्रिया के मामले में वह मौजूदा राजनीतिक पार्टियों, जिनकी अगुआई ऐसे डायनासोर कर रहे हैं जो अपनी पूंछ में आग लगने के बावजूद टस से मस नहीं होते हैं,के बीच अलग खड़ी नजर आती है।
अगर आप अपने दांव सही तरीके से चलती है तो वह अगले दशक में प्रमुख राष्ट्रीय पार्टी बन जाएगी। हालांकि आप को महसूस करना होगा कि मुख्य चिंता आप नहीं है बल्कि देश है। दुख की बात है कि आप की ताजा नीतियां और फैसले राष्ट्रीय हित के संदर्भ में कई बड़े सवाल खड़े करते हैं।
वोटरों की नजर में हीरो बनने के लिए आप ने दिल्ली में मुफ्त पानी सप्लाई और बिजली की दरों में सब्सिडी आधारित विचित्र कटौती की घोषणा की है। आंकड़े धुंधली तस्वीर पेश करते हैं लेकिन कुछ अनुमानों के अनुसार इससे दिल्ली सरकार को एक वर्ष में हजारों करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ेगा। इस धन का उपयोग अस्पताल, स्कूल, फ्लाईओवर बनाने, रोजगार पैदा करने और कई अन्य उद्देश्यों के लिए हो सकता था। आप ने बिजली सेक्टर में कथित भ्रष्टाचार को कम करने और उससे हुए फायदे को बिजली टैरिफ में कमी के बतौर जनता तक पहुंचाने का वादा चुनाव में किया था। लेकिन सब्सिडी के आधार पर टैरिफ में रियायत का निर्णय गैर जिम्मेदाराना है। यदि आप के बिजली टैरिफ फैसले को भारत भर में लागू कर दिया जाए तो लाखों करोड़ रुपयों का खर्च आएगा। ऐसे उपायों से देश की वित्तीय स्थिति चरमरा जाएगी और उत्पादक व उपयोगी निवेश के लिए बहुत कम धनराशि बचेगी। निजी क्षेत्र की कंपनियों को भी गलत संकेत गया है और वे बिजली सेक्टर में धन लगाना बंद कर देंगी। ऐसा करके आप ने वाहवाही लूटी है पर क्या इससे भारत का भला होगा?
आप द्वारा दिल्ली के कॉलेजों में दिल्ली वासियों के लिए 90 प्रतिशत आरक्षण की पहल पर भी गौर कीजिए। इनमें से कई कॉलेज नेशनल ब्रांड बन चुके हैं। इससे आप को दिल्ली में कुछ वोट मिल सकते हैं। हालांकि, कई स्तरों पर होने वाले नुकसान पर ध्यान दीजिए। इससे देश भर के छात्र सर्वश्रेष्ठ कॉलेजों में दाखिला लेने से वंचित हो जाएंगे। कॉलेजों को प्रतिभाशाली छात्रों से वंचित होना पड़ेगा। उनके ब्रांड को आघात पहुंचेगा। यह निर्णय भारत को विभाजित करेगा। लोगों पर दिल्ली में बसने के लिए दबाव बढ़ेगा। शहरी ढांचे पर बोझ पड़ेगा। इसके कारण अभिभावक अपने बच्चों को विदेश भेजने के लिए प्रोत्साहित होंगे। विदेशी मुद्रा का नुकसान होगा। क्या हमें इस सब पर बहस नहीं करनी चाहिए? दिल्ली के श्रेष्ठ कॉलेज पूरे देश में शाखाएं क्यों नहीं खोलते हैं।
एक बार फिर वही बात आती है। इस कदम से आप को फायदा हो सकता है लेकिन क्या इससे भारत को फायदा हुआ है। आप ईमानदार हो सकती है लेकिन यदि आप राष्ट्र के खजाने को नुकसान पहुंचाती है और अपनी पार्टी के लाभ के लिए नेशनल ब्रांड्स को नष्ट कर सकती है तो क्या आप पूरी तरह पवित्र है? या कि आप अब पवित्र नहीं रही?
आप में आम आदमी की जीवनशैली के प्रति दंभ और संपन्नता के लिए हिकारत का नजरिया भी दिखता है। अनाप-शनाप उपभोग गलत है। पर अच्छे रहनसहन के लिए प्रयास करना और कड़ी मेहनत,ईमानदारी से कमाए धन को खर्च करना कैसे नैतिक दृष्टि से उचित नहीं है? पिछले दशक में लाखों भारतीयों ने कठिन परिश्रम करके अपनी जीवनशैली को बेहतर बनाया है। इससे हमारा प्रति व्यक्ति जीडीपी बढ़ा है। क्या हमें इसे हतोत्साहित करना चाहिए? क्या हम ईमानदार लेकिन गरीब भारत चाहते हैं? क्या आप गरीब समर्थक है या गरीबी समर्थक है?
ऐेसा क्यों हो रहा है? आप अभी से गलती क्यों कर रही है? पहला कारण-लोकसभा चुनाव लडऩे की जल्दबाजी हो सकता है। दूसरा कार- भारत की जरूरत के अनुरूप दृष्टि का अभाव है। आप भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन की उपज है। अब वे राष्ट्रीय पार्टी बनना चाहते हैं। आप जो बनना चाहती है, उसके लिए नए सिरे से सोच विचार की जरूरत है। उसे शासन चलाना सीखना होगा। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि वह कैसे भ्रष्टाचार मुक्त भारत और युवाओं के लिए लाखों रोजगार देने वाली मजबूत अर्थव्यवस्था को साकार कर सकती है। इसमें समय लगेगा। हालांकि, आसन्न चुनाव और उसे मिला समर्थन इस महत्वपूर्ण प्रक्रिया में बाधा डाल रहे हैं। इस जल्दबाजी में आप ऐसे गलत लोगों को आकर्षित करने का जोखिम उठा रही है जो बेहतर भारत पर सत्ता को तरजीह देते हैं। अगर आप लोकसभा चुनाव की दौड़ से हट जाती है तो केवल समर्पित लोग पार्टी में शामिल होंगे।
आप के 2014 का लोकसभा चुनाव लडऩे से त्रिशंकु संसद और खिचड़ी सरकार बनने के आसार बढ़ जाएंगे। इसका जो भी अर्थ हो पर कई विदेशी सरकारें, निवेशक और स्थानीय उद्योगपति महसूस करते हैं कि नरेंद्र मोदी भारत को तरक्की के रास्ते पर वापस ला सकते हैं। मैं नहीं जानता कि वे वर्तमान आप के बारे में ऐसा ही सोचते हैं। ऐसी स्थिति में भारत के लिए क्या अच्छा है? अपनी सभी बुराइयों के साथ कांग्रेस को भारत पर शासन करने का सबसे अधिक अनुभव है जबकि आप को नहीं है। क्या उक्त अनुभव बेमतलब है? 2014 में जब हम भारत के बारे में सोचें तब क्या हमें इन फैक्टर पर विचार नहीं करना चाहिए। विजय के जोश में लोग बहक जाते हैं और बड़ी लड़ाई की तैयारियों की अनदेखी करते हैं। आप को इसके बारे में विचार करना चाहिए। नागरिकों को भी किसी राजनीतिक पार्टी की प्रगति के बजाय देश हित को वरीयता देनी चाहिए। देश की कमान ऐसे लोगों के हाथों में सौंपनी चाहिए जो न सिर्फ ईमानदार हों बल्कि देश को आगे ले जा सकें।
पहले भारत या पहले आप?
लेखक- चेतन भगत
साभार- दैनिक भास्कर
Wednesday, August 21, 2013
अमेरिकन डॉलर और भारतीय रूपये की असली कहानी
कृपया देश के लिए 7
दिन के लिए आप अपने कार को तभी उपयोग में लाये जब कोई विपति आप पड़े और और सच मानिये
डॉलर अपने जगह पर आ जायेगा । जी हा ये सच है डॉलर की कीमत बस पेट्रोल से ही बढ़ता है,
इसी को हम व्युत्पन्न व्यापार कहते है मतलब की हम दूसरी कोई वस्तु देके हम कोई और वस्तु
ले । अमेरिका ये जानता है की पेट्रोल उतना ही कीमती है जितना की सोना इसी लिए उसने
मध्य पूर्व के सभी तेल उत्पादक देशो से करार कर लिए की वो पेट्रोल केवल डॉलर में ही
बेचेंगे और जो भी देश इस करार के खिलाफ जाता है उसके साथ क्या होता है कहने की बात
नहीं है, चाहे इराक हो, ईरान हो, क्यूबा हो इन सब तेल देश उत्पादक देशो से अमेरिका
की हमेशा इसी लिए ठनी रहती है और सद्दाम हुसैन को झूठा आरोप लगा के मारने के पीछे असली
वजह ये करार ही था । और यही कारन है की अमेरिका अपने डॉलर पर ये छापता है की डॉलर उधार
व्यापर के लिए वैध है(THIS NOTE IS LEGAL TENDER
FOR ALL DEBTS, PUBLIC AND PRIVATE),
इसका मतलब ये हुआ की अगर आप डॉलर को पसंद नहीं करते हो और उसके बदले सोना की मांग करोगे
तो आपको वो सोना नहीं देंगे इसके उलट आप भारतीय रुपया के बदले सोना ले सकते हो(I PROMISE TO PAY THE BEARER THE SUM OF ONE HUNDRED RUPEES), आप देख सकते है की भारतीय नोट पर सीधा लिखा
होता है की " I PROMISE TO PAY THE BEARER THE
SUM OF ONE HUNDRED RUPEES" और उसके साथ हमारे रिज़र्व बैंक के गवर्नर का हस्ताक्षर
भी होता है जिसका मतलब है की आप को भारतीय मुद्रा नहीं पसंद तो फिर आप रिज़र्व बैंक
से उतने का सोना ले सकते है और रिज़र्व बैंक को ये देना होगा ( असल में लेन-देन में
कुछ मामूली अंतर आ सकता है ये उदाहरण आपको अच्छे से समझाने के लिए है)|
अब आप एक उदहारण ले,
भारतीय पेट्रोलियम मंत्री पेट्रोल खरीदने मध्य पूर्व के देशो में जाते है और उस देश
के पेट्रोल मंत्रालय कहता है की एक लिटर पेट्रोल एक डॉलर में आएगा, अब हमारे मंत्री
साहब के पास रुपया है और हमें भुगतान करना
है डॉलर में, तो अब वो क्या करेंगे वो सीधा अमेरिका से बोलेंगे की हमें डॉलर दीजिये
और अमेरिकन फ़ेडरल रिज़र्व श्वेत पत्र पर डॉलर को प्रिंट करेगा और हमारे मंत्री महोदय
को दे देगा और हमें मिल गया डॉलर और हम इसे उस देश को दे देते है और पेट्रोल खरीदते
है
लेकिन यहाँ एक
धोखा हुआ वो
कैसे देखिये अगर
आप का दिमाग
बदल गया और
आप उसे अमेरिका
को लौटाने जायेंगे
की हमें अब
जरुरत नहीं है
डॉलर के बदले
सोना आपको देने
की तो उनका
सीधा जवाब होता
है की "हमने
आपको कुछ लौटाने को
बोला था क्या?" क्या आपने
डॉलर को जांचा
नहीं ? हमने सीधा
सीधा लिखा है
की डॉलर एक
कर्ज है, उधार
है, और इसी
लिए अमेरिका को
सोना नहीं चाहिए
अपना डॉलर प्रिंट
करने के लिए
वो श्वेत पत्र
लेंगे और उस
पर डॉलर छापेंगे
जैसा वो करते
आये है ।
लेकिन मध्य पूर्व
देशो
को
अमेरिका
केवल
डॉलर
के
बदले
पेट्रोल
बेचने
के
बदले
में
क्या
देता
है?
मध्य पूर्व देश के
कई शाह अमेरिका
को किराया देते
है ताकि अमेरिका
उनके और उनके
उतराधिकारियो की सुरक्षा
कर सके, वैसे ही वो अभी भी अमेरिका का कर्ज चूका रहे है जो अमेरिका ने उनके यहाँ रोड,
भवन और देश निर्माण में निवेश किया है। यही है डॉलर इसी लिए कुछ लोग कहते है की एक
न एक दिन डॉलर भी धराशायी जरुर होगा। वर्तमान में भारत के साथ समस्या उन अमेरिकन डॉलर्स
को खरीदना है, तो एक प्रकार से अमेरिका का श्वेत पत्र भारत के सोने के बराबर है अगर
हम पेट्रोल और कार का उपभोग सिमित कर दे डॉलर अपने आप नीचे आ जायेगा|
सभी लोग रुपये
और डॉलर की
सच्चाई सबको इसे
शेयर जरुर करे
यहाँ पर पेट्रोल
के अलावा हम
अपने रूपया
के लिए और
भी एक छोटी
सी मदद कर
सकते है |
कृपया यहा कुछ
देर
समय
दे
अपने
देश
की
खातिर
यहाँ एक छोटा
सा उदहारण है
अगस्त 2008 में 1
US $=39.40
अगस्त 2013 में 1
$=64.45
क्या आप सोचते
है की अमेरिकी
अर्थव्यवस्था का विकास
हुआ है नही
लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था
का पतन जरुर
हुआ है , हमारी
अर्थव्यवस्था हमारे अपने हाथों
में है,
और हमारी
अर्थव्यवस्था अभी नाजुक
दौर में है, अपना
देश भी एशिया के और देशों के जैसे आर्थिक संकट से जूझ रही है, कई भारतीय उधोग बंद हो
गए। हम एक गंभीर आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहे है और यदि हमने सही कदम नहीं उठाया
तो बहुत जल्द हम एक गहरे संकट में होंगे । एक अनुमान के मुताबिक करीब 30,000करोड़ विदेशी
मुद्रा हम कास्मेटिक, स्नैक्स, चाय, और ठंढे पेय पदार्थो पर उड़ा देते है जो
की यहाँ पर बनती है और यही उनका हम उपभोग भी करते है लेकिन उनका सारा फायदा अवैध रूप
से बाहर चला जाता है, क्या आपको पता है की
एक ठंढा पेय की बोतल मात्र 70/80 पैसो में बनकर तैयार होती है लेकिन उसे 20/25 रूपये
में बेचीं जाती है और मुनाफे के रूप में एक मोटी रकम हम अपने देश से बाहर भेजते है,
यह हमारे अर्थव्यवस्था में एक बड़े छेद की
तरह है हैं, हम बहुराष्ट्रीय कम्पनियों के खिलाफ नही है लेकिन हमे अपना सही और ग़लत
देखना चाहिए हम सभी से आग्रह करते है कि कम से कम दो साल तक बस भारतीय और घरेलू निर्मित
सामान ही उपयोग में लायेंगे, नही तो जैसे जैसे पेट्रोल महंगा होगा और हम ऐसे ही विदेशी
वस्तुओं का उपभोग जारी रखा तो आने वाले समय में
रूपये की कीमत में और गिरावट होगी और अंत में हमें किसी भी वस्तु को खरीदने
के लिए और भी ज्यादा खर्च करना पड़ेगा ।
आप इसके लिए क्या कर सकते है?
केवल वही वस्तु ख़रीदे
जो पूर्णत: भारतीय हो, हम में से हर एक को इस जागरूकता का नेता होना चाहिए। यह एक मात्र
रास्ता है अपने देश को आर्थिक संकट से बचाने का, आपको अपने जीवनशैली को बदलने की जरुरत
नहीं है बस अपने उपयोग की वस्तुओ को बदल दे | रोजमर्रा की चीजे जैसे ठंढे पेय, नहाने
का साबुन, टूथपेस्ट, ब्रश, शेविंग क्रीम, ब्लेड, पाउडर, दूध का पावडर, शैम्पू, और खाद्य
सामग्री इत्यादि, आपको भारतीय उत्पाद खरीदना चाहिए और ये निश्चित करना चाहिए कि भारतीय
मुद्रा देश के बाहर नही जायेगी| एक एक भारतीय उत्पाद आप जो खरीदते है उससे एक बड़ा परिवर्तन
होगा, ये भारत को बचाएगा, ये भारतीय उधोग को बचाएगा तो चलिए आइये आज से ही हम एक परिवर्तन
की शुरुवात करते है| मैं या आप बहुराष्ट्रीय कम्पनियो के खिलाफ नहीं है हम तो बस अपना
और अपने देश का हित सोच रहे है, हर एक दिन हम एक संघर्ष करेंगे एक सच्चे आजादी के लिए,
उस आजादी के लिए जिसके लिए हमने बहुत सी कुर्बानिया दी है, हमारे वीर जवान बहुत बड़ी
शहादत दी ताकि हम शांति और अमन से रह सके लेकिन ये वक्त हमारे लिए डरावना है, एक सम्प्रभु
राष्ट्र के लिए खतरा है, बहुराष्ट्रीय कम्पनियो के लिए ये वैश्वीकरण है लेकिन हमारे
और आपके लिए ये एक उपनिवेश है आर्थिक उपनिवेश।
उपनिवेशी भारत को छोड़ चुके है लेकिन इस बार वो पुरी तैयारी के साथ पुरानी गलातियों
को सुधार के आयें है और हमें पहले से ज्यादा
मजबूर कर देंगे। रुस, दक्षिण कोरिआ, मेक्सिको और भी बहुत लंबी सूची है, हमे जरुरत है
उनके अनुभव और अपने इतिहास को ध्यान में रखते कुछ सीख लेने की, आइये एक सच्चे भारतीय
होने का फर्ज अदा करे | यह स्पष्ट है की उपर दी हुयी वस्तुओ की सुची को हम अपनी जिंदगी
से हटा नहीं सकते लेकिन बदल जरुर सकते है ।
Sunday, May 5, 2013
चीनी दुसाहस, हमारे कायर नेता और भांड मिडिया
चीन में अप्रैल 2013 के शुरुआत में ही नेतृत्व में बदलाव हुआ और
उसी माह में चीन ने एक बड़ा घुसपैठ अपने पडोसी भारत के सरजमी पर किया | भारत जो
की एक उभरता हुआ विश्व शक्ति है और बहुत साल पहले से ही ये मांग की जा रही थी की भारत
को अब विश्व स्तर पर एक अहम भूमिका निभाना चाहिए । एक देश जिसे संयुक्त राष्ट्र संघ
की सुरक्षा परिषद् में स्थायी सीट मिलते मिलते रह गया वो भी चीन की वजह
से वो चीन ही था जिसने भारत का विरोध किया था ये कहते हुए की खुद भारत में ही एक बिना
रीढ़ की सरकार है और उसे विश्व स्तर पर इतनी बड़ी भूमिका नहीं दी जा सकती |
कुछ साल पहले मैंने कही पढ़ा था की चीन भारत को सबक सिखाना चाहता है
और और वो एक बड़ा सैनिक अभियान करके
भारत के बड़े भू भाग पर कब्ज़ा कर सकता है और फिर समझौते के मेज पर वो कुछ शर्मनाक शर्ते थोप सकता है और भारत में
ये मांग उठी की एक सेना की डिविजन बने जाये जो उत्तर पूर्व में ही रहे लेकिन सरकार
ने बजट का रोना लेके इस मसले को ठंढे बस्ते में डाल दिया।
आखिर वही हुआ जिसका डर था चीन ने बिना एक गोली चलाये ही कुछ मीटर नहीं
बल्कि 20 किलोमीटर भारत के अंदरूनी हिस्से में आ गया और खुल्लम खुल्ला भारत को चुनौती
दे दी की जो करना है करो लो, भारत 1998 में ही परमाणु संपन्न हो गया था अग्नि, पृथ्वी
और भी कई तरह के मिसाइल है और लाखो सैनिक जो की बस एक इशारे पर ही अपने देश
के लिए अपनी जान देने को तैयार है, लेकिन हमारे पास एक सक्षम नेतृत्व, राजनितिक
ताकत और देशभक्ति की भावना की कमी है
चीन ने हमारी औकात हमें
दिखा दी है की अभी हम किस स्तर पर है, हमारे नेता जो की अव्वल दर्जे के कायर
है अब कहते फिर रहे है की अगर चीन ने ये सब नहीं किया होता तो हम चीन के दौरे पर जाते
अरे तुम अगर चीन जाते भी तो कौन तुम्हारी परवाह करता क्या किसी को लगता है की भारत
के जो भी राजनयिक चीन के दौरे पर जायेंगे तो चीन इन्हें थोडा सा भी भाव देता होगा कुत्ते
की तरह इनसे व्यवहार किया जाता होगा
चीन बस ये पुरे दुनिया
को दिखाना चाहता है की भारत जो की अपने ही सरजमीं की ही सुरक्षा नहीं कर पाया वो क्या
खाक विश्व स्तर पर एक बड़ी भूमिका निभाएगा, चीन ने ये साबित कर दिया की भारत में
अभी नपुंसक सरकार है और चीन अच्छी तरह से जानता है की भारत के भ्रष्ट नेता देश को लूटने
और अपना माल बनाने में व्यस्त है उन्हें जरा सा भी इस बात की फ़िक्र नहीं है की भारत
के सरजमीं पर चीन ने घुसपैठ किया है और भारतीय मिडिया नए रिलीज हुए फिल्मो और उनकी
मसालेदार खबरों , आईपीएल और फैशन शो में ही व्यस्त है क्या भारतीय मिडिया ने कभी ईमानदारी
के साथ चीन के घुसपैठ को दिखाया है ।
अभी असली कहानी तो बाकि
है चीन अभी हमारी ताकत और जूझने की क्षमता देख रहा है की हम कितना तैयार है उसकी इस घुसपैठ को लेते
है, हमारे नेता क्या प्रतिक्रिया देते है, चीन की तो असली मंशा पुरे जम्मू कश्मीर को
पाकिस्तान को तोहफे में देने की है जैसा पाकिस्तान ने चीन को गुलाम कश्मीर का एक हिस्सा
तोहफे में दिया था समय हमारे हाथ से निकलता जा रहा है "अभी नहीं तो कभी नहीं"
वाली स्थिति है युद्ध का पक्ष कोई नहीं लेता लेकिन जब देश संप्रभुता पर आंच आये तो
हमें कायरता से बाहर आके इसका मुहतोड़ जवाब देना चाहिए और पूरी दुनिया को दिखा देना
चाहिए की जब बात हमारी आजादी की हो तो हम भी किसी से कम नहीं
सबसे बड़ी शर्म तो देश के नेताओ और मिडिया को करना चाहिए, मिडिया
जो कि 24 घंटे
ड्रामा और बकवास करते रहती है अपना एक ओब वैन उस हॉस्पिटल के सामने खड़ा किया था
जब ऐश्वर्य रॉय उस हॉस्पिटल में थी लेकिन एक भी रिपोर्टर लद्दाख में नहीं
भेजा देश लुट रहा है और ये नेता और मीडिया एक जोंक की तरह देश का खून चूसने
में लगे है, ये नीच देश को एक धरती को टुकड़ा मानते है वो दिन दूर नहीं जब उनके
पाँव के निचे वो जमीं नहीं रहेगी तब ये इनको अहसास होगा की नहीं हमने गलती किया है
और अफ़सोस जताने के लिए इनके पास समय नहीं होगा ।
देश को आज स्वच्छ और निर्भय हृदय की जरुरत है आज हमें गुरु गोबिंद
सिंह जी जैसा योद्धा चाहिए जिन्होंने अपनी और अपने
परिवार की परवाह किये बिना शक्तिशाली मुगलों से टक्कर लिया और उन्होंने अपना सब
कुछ लुटा कर भी अपने धर्म और देश की रक्षा की ।
दोस्तों ये कठिन घडी है या तो कुछ करो नहीं तो शर्मनाक जिन्दगी
जिओ !!! (अनुवादित )
Saturday, April 20, 2013
खान्ग्रेस और चीन
चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की एक पलटन 15 अप्रैल की रात भारतीय भूक्षेत्र में 10 किलोमीटर अंदर तक डीबीओ सेक्टर के बरथे में घुस गई है,
चीन का इतिहास रहा है की जब जब भी अन्तराष्ट्रीय जगत का ध्यान किसी एक खास मुद्दे पर गंभीरता से रहता है तभी वो अपने शैतानी मंसूबो को अंजाम देता है जैसे की जब दो विश्व शक्तिया कम्युनिस्ट सोविअत संघ और पूंजीवादी अमेरिका 1960-70
के दशक में वियतनाम और INDO-CHINA में अपना वर्चस्व के लिए युद्ध में लगी थी तभी चीन ने भारत पर अचानक से हमला कर के सुदूर उतर में लद्दाख के एक बड़े भू भाग पर कब्ज़ा कर लिया और और अन्तराष्ट्रीय जगत का ध्यान इस घटना पर गया ही नहीं या जब तक जाता तब तक चीन ने अपना काम कर लिया तब हमारे रंगीले चाचा ने बोला था की चीन ने बस बंजर जमीं का एक टुकड़ा लिया है !
वैसा ही आजकल कोरियाई राष्ट्रों में युद्ध की धमक है और अमेरिका भी इसमें सम्मिलित है और उत्तर कोरिया के परमाणु हमले की धमकी के चलते पूरी दुनिया की नजरे आजकल कोरियाई राष्ट्रों और अमेरिका पर लगी है और चीन अपनी गन्दी नजरे फिर से हमारी जमीं पर लगा दी है और हमारी सत्तासीन खान्ग्रेस ने अपना पूरा जोर अपने विपक्षियो पर लगा दिया है, वो पुरे देश में खोज रहे है की कही तो कोई भगवा आतंकवादी मिल जाये ताकि अगले चुनावो में भाजपा और मोदी जी को निचा दिखाए !!
ये भी एक दुर्भाग्य है की जब जब खान्ग्रेस सत्ता में होती है तभी भारत की छवि पुरे विश्व में नीची होती है।
आज ही मैंने कही पढ़ा की सिन्धु नदी के जल बटवारे के समय हमारे रंगीले चच्चा ने करीब 80 % पानी पोर्किओ को दे दिया अख़बार में लिखा था की इनती द्विपक्षीय समझौतों में उदारता किसी ने नहीं देखा था विश्व में आज तक
पाकिस्तान ने सैनिको के सर काटे और खान्ग्रेस ने उनके प्रधानमंत्री के आगवानी के लिए हमारे साला-मन कुर्सीद को भेजा
हमने बंगलादेश को को पैसे और सहायता दी और आज वही बांग्लादेश और बंगलादेशियो के चलते देश में गृहयुद्ध जैसी स्थिति बनी है और बांग्लादेश में हिन्दुओ को दोयम दर्जे का जीवन जीने पर मजबूर किया गया है
हमने मालदीव को समय समय पर आर्थिक सहायता दी ताकि कभी आपातकाल में मालदीव में अपने नौसैनिक अड्डे की तरह उपयोग कर सके और वह पर एक अन्तराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए GMR जो की भारत की बड़ी विनिर्माण कम्पनी है जब आधा कम हो गया तो मालदीव ने उसे और भारत को ठेंगा दिखा दिया
पता नहीं क्यों हमारे रंगीले चच्चा और उनकी सुपुत्री पाकिस्तानियो के साथ बहुत ही उदार दिल व्यव्हार किया है तो आज एक रंगीली मैडम इटली के साथ वैसा ही व्यव्हार कर रही है
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